फोटो.... कोरोना योद्धा ः कोरोना संक्रमण रोकने में व्यस्त भूल गए अपना जन्मदिन - संक्रमण रोकने में लगे अपनों से हो गए हैं दूर आशुतोष यादव गाजियाबाद। पिछले 2 महीने से कोरोना नियंत्रण के लिए ड्यूटी में लगे सीनियर मलेरिया इंस्पेक्टर नरेंद्र सिंह को अपना जन्मदिन मनाने का भी मौका नहीं मिला। बृहस्पतिवार को जन्मदिन के मौके पर भी वह सर्वे और सैनिटाइजेशन करने वाली टीम के साथ लगे रहे। रात एक बजे घर पहुंचे तब तक बच्चे सो चुके थे। नरेंद्र के छह वर्षीय बेटे व चार वर्षीय बेटी ने बाबा व चाचा के साथ मिलकर उनके जन्मदिन का केक काटा। नरेंद्र के छोटे भाई ने घर पर खाना बनवा कर रेलवे स्टेशन और झुग्गी झोपड़ी में ले जाकर जरूरत मंदों को वितरित किया। सीएमओ और मलेरिया अधिकारी ने फोन कर उन्हें जन्मदिन की बधाई दिया तो पता चला कि वह कर्मचारियों के साथ सैनिटाइजेशन कराने फील्ड में गए हैं। नरेंद्र ने बताया कि जब अधिकारियों का फोन बधाई देने के लिए आया तब पता चला कि उनका जन्मदिन है। पहली बार सैनिटाइजेशन कराकर वापस लौटे तो कर्मचारियों ने बना ली थी दूरी फरवरी में शुरू हुए कोरोना संक्रमण के शुरुआत से ही नरेंद्र को डिसंक्रमित कराने की व्यवस्था का प्रभार दे दिया गया था। पांच मार्च को पहला मरीज राजनगर एक्सटेंशन में आने पर टीम को लेकर सैनिटाइजेशन कराने गए थे। उस समय वापस लौटकर आने के बाद कई कर्मचारियों ने दूरी बना ली थी। उसके बाद जैसे- जैसे मामला बढ़ता गया व्यस्तता भी बढ़ती गई। वह 12 फरवरी से लगातार सुबह नौ बजे घर से कार्यालय पहुंच जाते हैं, जबकि रात में घर पहुचंने में देर रात हो जाती है। दो महीने से नहीं हुई बच्चों से मुलाकात संक्रमण बढ़ने के साथ ही व्यस्तता भी बढ़ती गई और अब स्थिति यह है कि पिछले दो महीने से बच्चों से मुलाकात नहीं हुई। जिला मलेरिया अधिकारी जीके मिश्रा ने बताया कि कहीं भी संक्रमित मरीज की पुष्टि होती है तो जब तक उस क्षेत्र में सैनिटाइजेशन नहीं हो जाता है, तब तक नरेंद्र घर नहीं जाते हैं। कई बार स्थिति ऐसी बनी है कि रात में नौ बजे मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव आई और क्षेत्र में सैनिटाइजेशन कराने की जरूरत पड़ी तो रात में दो बजे तक सैनिटाइजेशन नरेंद्र के ही नेतृत्व में कराया गया। अब स्थिति यह है कि कई दिन तक कोई भी स्टाफ घर नहीं जा रहा है तो नरेंद्र भी यहीं पर रुक जाते हैं, जबकि उनका घर सबसे नजदीक है। बच्चों ने दादा के साथ मनाया पापा का जन्मदिन नरेंद्र के छोटे भाई पंकज ने बताया कि उनके बच्चे और भतीजे ने बृहस्पतिवार को कई बार फोन किया कि घर आकर केक काटो, लेकिन फोन नहीं उठा तो चार साल की बेटी नाराज हो गई, इसके बाद दादा ने बच्चों से केक कटवाया। उनके दीर्घायु के लिए घर में खाना बनवाकर झुग्गी- झोपड़ी में बांटा गया। वहीं कार्यालय के लोगों ने भी फोनकर करके उन्हें जन्मदिन की बधाई दी। --------------- आशुतोष यादव