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Ghaziabad News: 58.93 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में दोषी को दो वर्ष नौ माह एक दिन की सजा

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गाजियाबाद। जीटी रोड स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में 58.93 करोड़ रुपये के घोटाले के दोषी आईईडीएल कंपनी के कर्मचारी अनिल कुमार को विशेष सीबीआई कोर्ट ने दो वर्ष नौ माह एक दिन की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत के विशेष न्यायाधीश आनंद प्रकाश ने अनिल पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अनिल कुमार ने अदालत में अपना जुर्म स्वीकार कर लिया था, जिसके बाद अदालत ने उसकी फाइल अलग कर दी थी। अन्य आरोपियों के मामले में सुनवाई जारी है।
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घोटाले में शामिल बैंक अधिकारी और कंपनी के कर्मचारी
विशेष न्यायाधीश अनिल प्रकाश की अदालत से हुए निर्णय के अनुसार, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के जीटी रोड शाखा में 11 जनवरी 2010 से 26 मई 2012 तक शाखा प्रबंधक के रूप में तैनात आरएस ठाकुर, एमएमआर छाबड़ा और राजेश गुप्ता ने मिलकर आपराधिक साजिश के तहत 265 करोड़ रुपये की छूट और भुगतान की अनुमति दी थी। इसमें से 58.93 करोड़ रुपये अभी भी बैंक के बकाये में हैं। आरोप के मुताबिक, बैंक अधिकारियों ने आईईडीएल (इंटरनेशनल इलेक्ट्रॉन डिवाइस लिमिटेड) और सुशीला स्टील के साथ मिलकर फर्जी अनुबंधों और एलसी (लेटर्स ऑफ क्रेडिट) के माध्यम से धोखाधड़ी की। इस प्रक्रिया में बैंक को 58.93 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और दोषियों ने खुद अवैध लाभ अर्जित किया। इसके अलावा, आरोपियों ने पंजाब नेशनल बैंक से क्रेडिट रिपोर्ट हासिल किए बिना ही भुगतान की अनुमति दी थी। सीबीआई ने कंपनी कर्मचारी अनिल को भी जांच में आरोपी माना था।
फर्जी अनुबंध के तहत निकाली थी धनराशि
सीबीआई की जांच में पता चला था कि आईईडीएल के प्रबंध निदेशक सुधीर कुमार कौड़ा ने फर्जी अनुबंधों के जरिये पहले से ही निकाले गए पैसे की वसूली के लिए बैंक को धोखा दिया। कौड़ा ने बैंक को सुशीला स्टील के बकाया बिलों के लिए कॉर्पोरेट गारंटी दी थी, जबकि इन बिलों में किए गए संशोधन झूठे थे। इस प्रक्रिया के तहत, लगभग 206 करोड़ रुपये की राशि फर्जी अनुबंधों के तहत निकाली गई थी। इनमें से 58.93 करोड़ रुपये का भुगतान अभी भी बाकी था।
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सीबीआई की जांच और कार्रवाई
सीबीआई की जांच में यह भी सामने आया कि बैंक के अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी से भागते हुए, बिना उचित जांच के भुगतान की अनुमति दी। इस मामले में 44.12 करोड़ रुपये का भुगतान पहले ही अवैध तरीके से किया जा चुका था। साथ ही, 79.42 करोड़ रुपये की छूट भी अनधिकृत रूप से स्वीकृत की गई थी। इन सभी घटनाओं ने बैंक को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाया।
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