हड़ताल के कारण डिपो से बसें नहीं निकलने पर यात्रियों को परेशानी हुई। सुबह के समय नौकरी और अन्य जरूरी कामों के लिए निकले यात्री बसों का इंतजार करते दिखाई दिए। कई यात्रियों को बस नहीं मिलने पर ई-रिक्शा, ऑटो और अन्य निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा।
सिटी बसों के परिचालकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर बहरामपुर स्थित सिटी डिपो के बाहर शुक्रवार को हड़ताल की। सुबह छह बजे से करीब 50 परिचालक कार्य का बहिष्कार किया। परिचालकों के हड़ताल पर जाने के कारण डिपो में 37 सिटी बसें खड़ी रहीं। बसों का संचालन प्रभावित होने से विभिन्न रूटों पर सफर करने वाले यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
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परिचालकों का कहना है कि उन्हें प्रति किलोमीटर 4.26 रुपये की दर से भुगतान किया जाना चाहिए। इसके साथ ही हर माह की सात तारीख तक वेतन देने की मांग की गई है। परिचालकों ने अगस्त 2026 के बकाया भुगतान को भी जल्द जारी करने की मांग रखी है। उनका कहना है कि समय से भुगतान नहीं होने से उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
परिचालकों ने ड्यूटी के समय को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने आठ घंटे की ड्यूटी निर्धारित करने की मांग की है। उनका कहना है कि कई बार उनसे 14 से 15 घंटे तक ड्यूटी कराई जाती है, जिसे बंद किया जाना चाहिए। इसके अलावा निर्धारित संख्या से अधिक ड्यूटी करने पर अतिरिक्त भुगतान और त्योहारों पर ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहन राशि देने की मांग की गई है। परिचालकों ने जमा कराई गई करीब 30 हजार रुपये की राशि वापस करने, आईडी कार्ड उपलब्ध कराने और छोटी-छोटी पेनल्टी के आधार पर नौकरी से हटाने की कार्रवाई नहीं करने की मांग भी रखी है। उनका कहना है कि मांगों का समाधान होने तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया गया है।
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यात्रियों को करना पड़ा बसों का इंतजार
हड़ताल के कारण डिपो से बसें नहीं निकलने पर यात्रियों को परेशानी हुई। सुबह के समय नौकरी और अन्य जरूरी कामों के लिए निकले यात्री बसों का इंतजार करते दिखाई दिए। कई यात्रियों को बस नहीं मिलने पर ई-रिक्शा, ऑटो और अन्य निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा। परिचालकों ने चेतावनी दी है कि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को आगे भी जारी रखा जाएगा।
सिटी ट्रांसपोर्ट के एमडी केसरी नंदन चौधरी ने कहना है कि इस हड़ताल को लेकर पूर्व में कोई जानकारी नहीं दी गई थी,अचानक हड़ताल पर बैठ जाना और संचालन को बाधित करना असंवैधानिक है। इसपर कार्रवाई की जाएगी।