गाजियाबाद। आशियाना दिलाने के नाम पर भूमाफियाओं ने खेतों में ही नहीं सरकारी जमीनों पर भी प्लाटिंग कर दी। नूर नगर, सिहानी, नंदग्राम, करहेड़ा, कनावनी में हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में भी कालोनियां बसा दी गई।
नगर निगम और जीडीए के अफसरों की नाक के नीचे सरकारी और खेती की जमीनों पर निर्माण हो गए लेकिन अफसर चुप्पी साधे रहे। दोनों विभागों में तालमेल न होने की वजह से यहां अवैध निर्माण का बड़ा जाल फैल गया।
सस्ते प्लाट के चक्कर में लोगों ने भी अपनी मेहनत की कमाई को यहां निवेश कर दिया लेकिन अब सरकार की सख्ती से उन पर भी संकट मंडरा रहा है। अर्थला में शहर की इकलौती झील भी अवैध कब्जे से अछूती नहीं रही। यहां भूमाफियाओं ने झील की जमीन भी बेच दी।
मिट्टी का भराव कर पहले झील को पाटा गया और फिर यहां मकान बना दिए गए। झील के खसरा नंबरों पर अब इमारतें खड़ी हो गई हैं। यही नहीं शहर के 100 से ज्यादा तालाबों की जमीनों पर भी कंक्रीट का जंगल खड़ा हो चुका है।
एनसीआर के मुख्य शहर गाजियाबाद में जमीनों की कीमतें बढ़ी तो भूमाफियाओं ने हिंडन को भी नहीं बख्शा। हिंडन नदी की ‘गोद’ में भी प्लाटिंग कर दी गई। करीब तीन साल पहले जीडीए ने डूब क्षेत्र में बने मकानों को हटाने के लिए नोटिस भी जारी किए थे, लेकिन लोगों के विरोध के चलते इन अवैध निर्माणों को नहीं हटाया गया।
बोले अधिकारी
सरकारी जमीनों पर कब्जे की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाती है। बीते दिनों सिद्धार्थ विहार के पास करीब 24 बीघा जमीन पर की जा रही प्लाटिंग को रुकवाकर कार्रवाई की गई थी। - अब्दुल समद, नगरायुक्त
खेती की जमीन पर बने प्लाट पर जीडीए की ओर से नक्शा पास नहीं किया जाता। लोग प्लाट या मकान खरीदने से पहले जीडीए में इंक्वायरी कर यह जरूर पता कर लें कि जमीन वैध है या अवैध। कालोनाइजरों के झांसे में लोग अपनी मेहनत की कमाई को न फंसाएं। - रवींद्र गोडबोले, सचिव, जीडीए