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MMG अस्पताल में बड़ी लापरवाही: खून से भरे बैग सड़क पर खींच लाए थे कुत्ते, प्रशासन ने दिए जांच के आदेश

Tue, 03 Oct 2023 01:58 PM IST
अनुज कुमार माई सिटी रिपोर्टर, गाजियाबाद

सार

एमएमजी अस्ताल में सड़क पर खून के बैग बिखरे मिले थे। सीएमएस डॉ. मनोज चतुर्वेदी का कहना है कि पूरा प्रकरण संज्ञान में आया है। जिम्मेदार लोगों से जवाब मांगा गिया है। क्योंकि संक्रमित खून से किसी भी स्वस्थ व्यक्ति को संक्रमण हो सकता था।
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एमएमजी अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एमएमजी अस्पताल में खून से भरे कई बैग सड़क पर बिखरे हुए थे। खून से भरे बैगों को बोरे में भरकर बायो वेस्ट डिस्पोज रूम बायो हैजार्ड में फिंकवाया गया था। वहां कुत्तों ने ब्लड बैगों को बोरे में निकाल कर सड़क पर खींच ले गए। संक्रमित खून से किसी भी स्वस्थ व्यक्ति में संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। एक अक्तूबर को अस्पताल में स्वच्छता अभियान चलाया गया था, जबकि दो अक्तूबर को अस्पताल परिसर में कुत्ते खून और खून का बैग खींच रहे थे।

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लगाए गए थे कई रक्तदान शिविर 
एमएमजी अस्पताल में आयुष्मान सेवा अभियान के तहत कई रक्तदान शिविर लगे थे। प्रशासन की ओर से भी रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया था। कई स्वयं सेवी संस्थाओं और कंपनियों ने भी शिविर लगवाया था। आशंका जताई जा रही है कि शिविर में ब्लड बैंक को कुछ संक्रमित रक्त मिला होगा, जिसका प्रयोग नहीं किया जा सकता इसलिए उसे नष्ट करने के लिए बायो मेडिकल वेस्ट में फिंकवा दिया गया हो।

खून के खाली बैग कुत्ते खींच लाए थे बाहर
एमएमजी अस्पताल के रक्तकोष प्रभारी डॉ. एसपी सिंह का कहना है कि उन्हें सूचना मिली थी कि बायोवेस्ट निस्तारण कक्ष में रखे कुछ खून के खाली बैग और खून निकालने की नली कुत्तों ने खींचकर बाहर निकाल दिया था। अगर कुछ बैग भरे भी हैं तो उनका रक्तकोष से से कोई मतलब नहीं है। 

हो सकता है कि ब्लड बैंक से वार्ड से मरीजों को चढ़ाने के लिए खून मंगवाया हो और बुखार होने के बाद मरीज को खून चढ़ाया नहीं गया हो। इसके बाद खून को खराब मानकर स्टाफ ने बायो मेडिकल वेस्ट में फेंक दिया हो। ब्लड बैंक के वरिष्ठ टेक्नीशियन एके तोमर का कहना है कि ब्लड बैंक में यदि खून खराब हो जाता है, तो भी उसे फेंका नहीं जाता। खराब होने वाले ब्लड को दवा कंपनियों को दे दिया जाता है, जो दवाइयां बनाने के काम आता है।

बड़ी मात्रा में निकलता है बायो मेडिकल वेस्ट
एमएमजी अस्पताल में ढाई हजार मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं। इनमें से 55 से 60 मरीज ऑपरेशन, एनीमिया और बुखार से ग्रसित होने पर भर्ती होते हैं। इनमें कई मरीजों को खून चढ़ाने की जरूरत होती है। इसके अलावा बड़ी मात्रा में वायो मेडिकल वेस्ट निकलता है। इनमें रक्त के खाली बैग, सीरिंज, रूई, पट्टियां, ग्लूकोज की बोतलें समेत अन्य सामग्री भी होती है। 

अस्पताल की ओर से बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए एक कंपनी से अनुबंध किया गया है। जो प्रतिदिन दो बजे के बाद मेडिकल वेस्ट एकत्र करने के लिए आती है। बायो मेडिकल वेस्ट को सुरक्षित रखने के लिए अस्पताल परिसर में तीन कमरे बनाए गए हैं। उसमें जमा किया जाता है। इन कमरों के हमेशा बंद करके रखा जाता है, जिससे कोई भी वेस्ट किसी के भी संपर्क में न आ सके।

पूरे प्रकरण की कराई जाएगी जांच
अस्पताल के सीएमएस डॉ. मनोज चतुर्वेदी का कहना है कि पूरा प्रकरण संज्ञान में आया है। मामले में ब्लड बैंक से जुड़े अधिकारियों और वार्ड से स्पष्टीकरण मांगा गया है। मंगलवार को पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी कि लापरवाही किस स्तर से हुई है। प्राथमिक तौर पर सफाई कर्मचारी की लापरवाही सामने आई है क्योंकि उसने वेस्ट हैजार्ड में रखने के बाद शटर का ताला नहीं बंद किया और कुत्ते बाहर खींचकर ले गए। उससे भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।
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मांगा गया है स्पष्टीकरण
वहीं सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार का कहना है कि यह बहुत ही गंभीर मामला है। किसी भी तरह बायोवेस्ट सड़क पर नहीं बिखरना चाहिए। अस्पताल के सीएमएस से स्पष्टीकरण लिया जाएगा कि लापरवाही किस स्तर से हुई है।
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