गाजियाबाद। शहर में पालतू बिल्लियों की संख्या बढ़ती जा रही है, लेकिन पंजीकरण प्रक्रिया की रफ्तार नहीं बढ़ी है। पेट शाॅप चलाने वाले कारोबारियों की माने तो शहर में लगभग 2500 पालतू बिल्लियां हैं। वहीं नगर निगम में महज 200 बिल्लियों का ही पंजीकरण है।
शहर में पालतू पशुओं का कारोबार करने वाले अनिल मलिक ने बताया कि पिछले कुछ सालों में लोगों में कुत्तों के साथ ही बिल्लियों को भी पालने का शौक बढ़ा है। खासकर महिलाएं और युवतियां कुत्तों की अपेक्षा बिल्लियों को पालने में अधिक रुचि दिखा रही हैं। इनमें बॉम्बे कैट, हिमालयन, सियामी, मेनकून, पार्शियन बिल्लियां ज्यादा पसंद की जा रहीं हैं। उन्होंने बताया कि एक हिमालयन बिल्ली की कीमत 35000 हजार रुपये है। इनका खानपान और रहन-सहन अलग होता है। साथ ही मौसम के अनुसार रखरखाव करना होता है। इसमें रोजाना एक हजार रुपये खर्च आता है। अगर इनकी देखरेख में कमी हो जाती है तो तबीयत बिगड़ जाती है। ऐसे में इनके वैक्सिनेशन समेत अन्य कार्यों को समय से पूरा कराना पड़ता है।
निगम की ओर से चलेगा विशेष अभियान
उपमुख्य पशु चिकित्साधिकारी डाॅ. अनुज सिंह ने बताया कि पालतू कुत्तों के साथ-साथ निगम की ओर से अब पालतू बिल्लियों के पंजीकरण के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। सोसायटियों और कॉलोनियों में निगम की टीम सर्वे करके पालतू बिल्लियों के पंजीकरण को बढ़ाने के लिए कार्य करेगी।