आमतौर पर चिकनगुनिया भले ही जानलेवा न हो, लेकिन डायबिटीज, हाईपरटेंशन (उच्च रक्तचाप), हृदय, किडनी और कैंसर के रोगियों में ये वायरस जानलेवा साबित हो सकता है।
दिल्ली और गाजियाबाद में अब तक चिकनगुनिया से हुई मौतों में से तीन मरीज डायबिटीज के बताए जा रहे हैं, जबकि बाकी मरीज कैंसर, किडनी और हृदय रोग से ग्रस्त होने के साथ ही उम्रदराज थे, जिन्हें चिकनगुनिया का सबसे ज्यादा खतरा था।
सीनियर कंसेल्टेंट इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डा. असित खन्ना ने बताया कि डायबिटीज, हाइपरटेंशन और हृदय रोगियों में चिकनगुनिया का वायरस खतरनाक है। मरीज के दिमाग तक इंफेक्शन पहुंचने पर शरीर सेप्टिक शॉक में जा सकता है, जिससे मल्टीपल आर्गेन फेलियर की स्थिति बन जाती है और मरीज को बचाना मुश्किल हो जाता है।
सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डा. पवन शर्मा ने बताया कि पहले से ही बीमारी होने पर चिकनगुनिया के वायरस को नियंत्रण में रखना मुश्किल होता है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, जिसकी वजह से मौत हो सकती है। इन बीमारियों से ग्रस्त मरीजों को चिकनगुनिया होने पर लगातार मॉनीटरिंग की जरूरत होती है।
ऐसे में, इन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की सबसे ज्यादा आवश्यकता है।
- उम्र 60 के पार तो बरतें अधिक एहतियात
अगर चिकनगुनिया के मरीज की उम्र 60 के पार हैं, तो इन मरीजों पर अधिक एहतियात बरतने की जरूरत होती है। उम्र बढ़ने के साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर पड़ता है, जिससे खतरा बढ़ जाता है। गौरतलब है कि गाजियाबाद में चिकनगुनिया से हुई दोनों मौतों में मरीज की उम्र 60 के पार रही।
- नवजात शिशुओं का अधिक रखें ख्याल
शिशु रोग विशेषज्ञ डा. सचिन भार्गव ने बताया कि नवजात शिशुओं को चिकनगुनिया के मच्छर से बचाने की बेहद जरूरत है। नवजात शिशु में इंफेक्शन का खतरा अधिक रहता है।