गाजियाबाद। नंदग्राम की नई बस्ती में 22 जनवरी की रात नौ बजे की गई चंचल कुमार (34) की हत्या उसके ही तीन दोस्तों ने की थी। डेढ़ साल पहले तक चारों साथ में गांजा तस्करी करते थे। तस्करी से हुई कमाई पर विवाद हो जाने पर चंचल ने एक दोस्त की पिटाई कर दी थी। पिटाई का बदला लेने के लिए उसने अपने भाई और दोस्त के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची। पुलिस ने बृहस्पतिवार की रात 12 बजे दो आरोपियों को गिरफ्तार कर घटना का खुलासा कर दिया।
पुलिस उपायुक्त नगर राजेश कुमार ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज से आरोपियों की पहचान हो गई थी। इसके बाद पुलिस उनकी तलाश कर ही रही थी कि मधुबन बापूधाम में उनसे सामना हो गया। उन्होंने गोली चला दी। जवाबी फायरिंग में मधुबन बापूधाम के ही निवासी अरुण कुमार और काशीराम काॅलोनी का अनुज गौतम उर्फ बाबा घायल हो गए। दोनों के पैर में गोली लगी। उनसे तमंचे और कारतूस बरामद किए गए हैं। अरुण के खिलाफ पहले से एनडीपीएस और दुष्कर्म का केस दर्ज है। नितिन के खिलाफ गौतमबुद्धनगर में हत्या का मुकदमा दर्ज है। हत्या में अरुण का भाई नितिन भी शामिल रहा। उसकी तलाश की जा रही है। अरुण ने पूछताछ में बताया कि गांजा तस्करी से हुई कमाई में से उसके हिस्से की रकम चंचल ने अपने पास रख ली थी। मांगने पर दी नहीं। नितिन ने इसका विरोध किया। इस पर चंचल ने दोस्तों के साथ मिलकर उसे पीटा। यह घटना डेढ़ साल पहले की है। तभी से उसने ठान रखा था कि इसका बदला चंचल की हत्या करके लेना है। बदला देने के लिए उसने भाई नितिन और अनुज के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची।
अनुज ने सीने और अरुण ने पीठ पर मारी गोली
दीनदयालपुरी निवासी चंचल की हत्या नई बस्ती के पार्क में की गई थी। आरोपियों से पूछताछ के हवाले से डीसीपी ने बताया कि नितिन ने चंचल को पार्क में बैठे देखा। उसने छोटे भाई अरुण को फोन कर पार्क में बुलाया। अरुण के साथ उसका दोस्त अनुज गौतम भी था। अरुण और अनुज पार्क में बैठे चंचल के पास पहुंचे। अरुण ने चंचल के सीने पर और अनुज ने पीठ पर तमंचे से गोली मार दी और बाइक लेकर चले गए। नितिन पार्क के पास ही घूमता रहा। चंचल के परिजन उसे अस्पताल लेकर गए तो वह वहां भी गया।
एफआईआर में दूसरों के नाम देख बेफिक्र हो गए थे आरोपी
चंचल की हत्या में परिजनों ने नामजद केस दर्ज कराया था। इसमें गौरव और उसके साले प्रिंस को नामजद कराया गया। दोनों के साथ चंचल की पुरानी रंजिश चल रही थी। अरुण, नितिन और अनुज को इसका पता चला तो वे बेफिक्र हो गए। इसी वजह से शहर से नहीं भागे। मधुबन बापूधाम में ही रहे। डीसीपी ने बताया कि नामजद आरोपियों की हत्या में कोई भूमिका नहीं मिली है। विवेचना में उनके नाम निकाल दिए जाएंगे।