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Ghaziabad: चादर गैंग ने चुराई थी इंदिरापुरम से तीन करोड़ की घड़ियां, दो बदमाश गिरफ्तार

Fri, 30 Aug 2024 02:43 AM IST
गाजियाबाद ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद

सार

डीसीपी ट्रांस हिंडन निमिष पाटिल ने बताया कि बिहार के मोतिहारी के घोड़ासहन निवासी संतोष और रोहित ने पूछताछ में बताया कि वे पहले मुर्गा मछली फ्राई करने की रेहड़ी लगाते थे लेकिन ज्यादा कमाई नहीं होने के कारण काम छोड़ दिया।
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गिरफ्त में आरोपी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इंदिरापुरम में 10 अगस्त की रात घड़ी के शोरूम का शटर उखाड़कर तीन करोड़ की कीमत की घड़ियां चोरी करने की घटना का क्राइम ब्रांच, स्वाट टीम और इंदिरापुरम पुलिस ने बृहस्पतिवार को खुलासा किया है।
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बिहार के घोड़ासहन के चादर गैंग के 10 बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने गिरोह के दो बदमाशों संतोष कुमार जायसवाल और रोहित कुमार पासवान को गिरफ्तार कर उनके पास से 46.36 लाख की कीमत की 125 ब्रांडेड घड़ियां बरामद की हैं। आठ फरार बदमाशों की तलाश के लिए टीमें लगी हैं।

डीसीपी ट्रांस हिंडन निमिष पाटिल ने बताया कि बिहार के मोतिहारी के घोड़ासहन निवासी संतोष और रोहित ने पूछताछ में बताया कि वे पहले मुर्गा मछली फ्राई करने की रेहड़ी लगाते थे लेकिन ज्यादा कमाई नहीं होने के कारण काम छोड़ दिया। घोड़ासहन में चोरी करने के कई गिरोह चलते हैं जो अलग-अलग राज्यों में घटनाएं करते हैं। संतोष ने बताया कि उसकी मुलाकात सचिन व सिराज से हुई और उनके साथ काम करने लगा। पूर्व में उसने सिराज के गैंग के साथ उत्तराखंड के ज्वालापुर हरिद्वार में मोबाइल के शोरूम में वारदात की थी। जिसमें गिरोह के नौ सदस्य गिरफ्तार हुए।
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वह फरार था तो उस पर एक लाख का इनाम भी रखा गया था। जिसके बाद वह पकड़ा गया। जेल से बाहर आने के बाद फिर से गिरोह बनाकर बनाकर वारदात करने लगे। रोहित पासवान ने बताया कि उसने घोड़ासहन के रोहित, राहुल पासवान, नईम उस्ताद और विजय के साथ मिलकर महाराष्ट्र में भी चोरी की वारदात की थी। जिसमें नौ लोग पकड़े गए थे। दोनों ने बताया इंदिरापुरम में 10 अगस्त की रात को उनके साथ सिराज, जितेंद्र उर्फ जीतन साहनी, रोशन, राहुल पासवान, जीतन पासवान, सचिन, प्रमोद और आसामी उर्फ संतोष ने वारदात की। सचिन, प्रमोद और आसामी उर्फ संतोष नेपाल के रहने वाले हैं।

गिरोह के कुछ लोग पहले आकर क्षेत्र में रेकी करते हैं। इसके बाद अपने साथियों को बुलाकर दुकान के आगे दो लोग चादर लगाते हैं और दो-तीन लोग शटर उखाड़ते हैं बाकी आसपास निगरानी रखते हैं। शटर उखाड़ने के बाद वे अंदर जाकर चोरी करके वहां से अलग-अलग रास्तों पर निकल जाते हैं और चोरी का सामान आपस में बांट लेते हैं। डीसीपी ने बताया संतोष के खिलाफ अलग-अलग राज्यों में चार और रोहित पर दो मुकदमे दर्ज हैं। अन्य आपराधिक इतिहास खंगाला जा रहा है।

नोएडा में कमरा किराये पर लेकर की थी रेकी
पूछताछ में संतोष ने बताया कि 20 दिन पहले वह सचिन, प्रमोद और आसामी के साथ नोएडा के सेक्टर 63 में आया था। वहां उन्होंने रंगाई-पुताई वाला बनकर एक कमरा किराये पर लिया था। इसके बाद 20 दिन तक शोरूम की रेकी की। रेकी के बाद उन्होंने अपने बाकी साथियों को बुला लिया और 10 अगस्त की रात वारदात को अंजाम दिया। उसने और रोहित ने दुकान के बाहर चादर पकड़ी। शटर उखाड़ने के बाद प्रमोद और संतोष अंदर जाकर घड़ियां चोरी कर बैग में भर लिए। बाकी लोग आसपास निगरानी में रहे। कुछ भी गड़बड़ होने पर सीटी बजाकर साथियों को सचेत कर देते हैं।

चोरी करने वाले को प्लेयर और निगरानी करने वाले को बोलते हैं फील्डर
गिरोह के लोग आपस में कोड वर्ड में बात करते हैं। संतोष ने बताया कि घटना करने के दौरान अंदर जाने वालों को प्लेयर नाम से बुलाते हैं। बाहर निगरानी करने वालों फील्डर बुलाते हैं और चादर लगाने के लिए छप्पर लगाना कहते हैं। पूछताछ में संतोष ने बताया कि जो लोग रेकी करते हैं, उन्हें ज्यादा सामान मिलता है। बाकी आपस में बांट लेते हैं।
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