गाजियाबाद। जिले में राष्ट्रीय अंधता नियंत्रण कार्यक्रम के तहत मोतियाबिंद के ऑपरेशन की रफ्तार सरकारी अस्पतालों में बेहद धीमी है। पिछले छह महीनों के आंकड़े बताते हैं कि जहां सरकारी अस्पतालों में केवल 799 ऑपरेशन हुए, वहीं निजी अस्पतालों में 5279 और एनजीओ के माध्यम से 5566 ऑपरेशन कराए गए।
इस स्थिति को देखते हुए जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव गोपाल ने सरकारी अस्पतालों की कार्यशैली पर नाराजगी जताई और फटकार लगाई।
जिले में मोतियाबिंद के ऑपरेशन की संख्या बढ़ाने के लिए अब पूरी तरह से आशा कार्यकर्ताओं पर निर्भरता बढ़ा दी गई है। स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद है कि उनके सहयोग से सरकारी अस्पतालों में भी ऑपरेशनों की संख्या में वृद्धि होगी और राष्ट्रीय अंधता नियंत्रण कार्यक्रम को मजबूती मिलेगी।
नगरीय स्वास्थ्य केंद्र के नोडल अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि शहरी क्षेत्र में कार्यरत आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर मोतियाबिंद के संभावित मरीजों की पहचान करेंगी। उन्हें सरकारी अस्पताल तक लाने का कार्य करेंगी।
11 अक्तूबर से शुरू हो रहे दस्तक अभियान के साथ यह पहल शुरू की जाएगी। आशाएं चिह्नित मरीजों की जानकारी उच्च अधिकारियों को देंगी ताकि उनका समय पर जिला अस्पताल में ऑपरेशन कराया जा सके। संजय नगर स्थित संयुक्त चिकित्सालय में सीएमएस डॉ. संजय गुप्ता, आई सर्जन डॉ. सुचिता, डॉ. अनीता, अवधेश कुमार सचान और स्टाफ की उपस्थिति में आंखों की देखभाल और बीमारियों की रोकथाम पर जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का उद्देश्य आमजन को आंखों की सुरक्षा और समय पर उपचार के लिए प्रेरित करना था। विश्व दृष्टि दिवस के मौके पर संयुक्त जिला अस्पताल में कुल 128 मरीजों की जांच की गई, जिनमें से 13 मरीजों का मोतियाबिंद और दो का काला मोतिया का ऑपरेशन किया गया।
एमएमजी अस्पताल में आठ मरीजों की सर्जरी हुई। अस्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र कुमार, सीएमएस डॉ. राकेश कुमार समेत अन्य चिकित्सक मौजूद थे।