अंतरराज्यीय गिरोह ऐसे करता था काम
पुलिस सूत्रों के अनुसार, फर्जी पासपोर्ट बनाने वाले इस गिरोह के तार कई राज्यों में फैले हैं। गिरोह न्यायिक कार्यवाही से बचने के लिए अपराधियों, वांछितों, पैरोल जंपर्स व अन्य लोगों के फर्जी पासपोर्ट तैयार कर उन्हें विदेश भेजने में सहयोग करता था। इसके लिए फर्जी आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड भी तैयार किए जाते थे।
प्रति पासपोर्ट एक से दो लाख रुपये वसूलते थे
पुलिस की प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह एक फर्जी पासपोर्ट बनाने के लिए एक से दो लाख रुपये तक वसूलता था। पुलिस को सत्यापन करने के नाम पर 15 हजार और पोस्टमैन को इसकी रिपोर्ट मुहैया कराने के लिए दो से पांच हजार रुपये प्रति पासपोर्ट रिश्वत दी जाती थी।
कई कुख्यात भी बनवा चुके हैं फर्जी पासपोर्ट
आपराधिक प्रवृत्ति के लोग गाजियाबाद ही नहीं, पश्चिमी यूपी के कई जिलों से फर्जी पासपोर्ट बनवा चुके हैं। इस तरह के प्रकरणों में कई पुलिसकर्मियों पर गाज भी गिर चुकी है। अब भोजपुर थाना क्षेत्र में 22 फर्जी पासपोर्ट बनवाने के मामले ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पांच रोहिंग्याओं के फर्जी पासपोर्ट हो चुके है जारी
मेरठ में साल 2013 से 2016 तक पांच रोहिंग्याओं के फर्जी पासपोर्ट जारी हो चुके हैं। इस मामले का साल 2021 में खुलासा हुआ था। एटीएस की जांच में मेरठ के पते पर हाफिज शफीक, जो लिसाड़ी गेट का दर्शाया गया था के नाम से पासपोर्ट बनाना सामने आया था। रोहिंग्या अबू आलम निवासी नया मकान अहमद नगर लिसाड़ी गेट, मोहम्मद अजीज, रिहाना मोहम्मद हसन निवासी जाटव स्ट्रीट बनियापाड़ा कोतवाली मोहम्मद उल्ली निवासी का फर्जी आधार कार्ड और पासपोर्ट मेरठ से तैयार किया गया था।