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Ghaziabad News: 12 लाख में बेची कार, 8.80 लाख रुपये का नहीं हुआ भुगतान, परिवाद दर्ज करने का आदेश

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गाजियाबाद। कार बेचने के बाद 8.80 लाख रुपये का भुगतान नहीं करने और वाहन वापस नहीं लौटाने के मामले में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कोर्ट संख्या-दो ने प्रार्थना पत्र को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है। क्रॉसिंग रिपब्लिक थाना क्षेत्र के इस मामले में शिकायतकर्ता रोशन ने आदित्य मसीह और विपिन कुमार पर धोखाधड़ी और आपराधिक न्यासभंग का आरोप लगाया है। अदालत ने पुलिस से विवेचना कराने के बजाय परिवाद के रूप में सुनवाई करने का निर्णय लिया है। मामले में 20 नवंबर को बयान दर्ज करने की तारीख तय की है।
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12 लाख रुपये में हुआ था सौदा
अदालत में दी अर्जी के अनुसार रोशन अपनी कार बेचना चाहते थे। रूपेंद्र सिंह के माध्यम से उनकी मुलाकात आदित्य मसीह और विपिन कुमार से हुई। दोनों ने झारखंड के परिवहन विभाग के नंबर की कार 12 लाख रुपये में खरीदने पर सहमति जताई। 20 सितंबर 2025 को बिक्री का अनुबंध किया गया। इसके तहत एक महीने में 1.50 लाख रुपये और शेष 10.50 लाख रुपये 50 हजार रुपये की मासिक किस्तों में देने की बात तय हुई थी। किस्त नहीं देने पर कार वापस करने की शर्त भी रखी गई थी।
किस्तें बंद करने का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि शुरुआत में कुछ रकम देने के बाद आरोपियों ने किस्तें देना बंद कर दिया। इसके अलावा वाहन के पंजीकरण संबंधी कार्य के नाम पर विपिन कुमार ने एक लाख रुपये नकद लिए। कई बार मांग करने के बावजूद न तो बकाया रकम मिली और न ही कार वापस की गई। शिकायतकर्ता के मुताबिक, 8.80 लाख रुपये बकाया हैं। पुलिस से शिकायत के बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं होने पर रोशन ने अदालत का रुख किया। अदालत ने माना कि शिकायतकर्ता घटना के तथ्यों से परिचित है और साक्ष्य प्रस्तुत कर सकता है। ऐसे में पुलिस विवेचना आवश्यक नहीं है।
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