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Ghaziabad News: नए निवेशकों को बुलाया, पुरानों को बिजली आपूर्ति भी नहीं दे पा रहे अधिकारी

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गाजियाबाद। जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार नए निवेशकों को निवेश के लिए जिले में बुला रही है, लेकिन पुरानों को बिजली आपूर्ति तक नहीं दे पा रहे। ट्रॉनिका सिटी, साउथ साइड जीटी रोड औद्योगिक क्षेत्र में रोजाना हो रही छह से आठ घंटे की कटौती से उद्यमी परेशान हैं। मेरठ रोड औद्योगिक क्षेत्र में भी रोजाना तीन से चार घंटे की कटौती की वजह से उद्यमियों को जनरेटर चलाने पड़ रहे हैं। जनरेटर पर खर्च बढ़ने की वजह से छोटे उद्योगों के उद्यमियों को उत्पादन बंद करना पड़ रहा है।
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इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन गाजियाबाद के चेयरमैन राकेश अनेजा ने बताया कि ट्रॉनिका सिटी औद्योगिक क्षेत्र और साउथ साइड जीटी रोड औद्योगिक क्षेत्र में बिजली के खंभे, तार, ट्रांसफार्मर पुराने और जर्जर हो चुके हैं। आए दिन इनमें फॉल्ट आ जाते हैं और एक फॉल्ट को ठीक करने में तीन से चार घंटे लग जाते हैं। इन दोनों औद्योगिक क्षेत्र में रोजाना छह से आठ घंटे की कटौती हो रही है। उन्होंने बताया कि ट्रॉनिका सिटी औद्योगिक क्षेत्र में ज्यादातर छोटी औद्योगिक इकाई हैं। इनके लिए रोजाना 8 घंटे जनरेटर चलाकर उत्पादन करना संभव नहीं है। बीते दो महीने में उत्पादन करीब 30 से 40 फीसदी कम हो गया है। उद्यमियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। मेरठ रोड औद्योगिक क्षेत्र में कुछ बड़ी इकाईयां जनरेटर चलाकर उत्पादन करने में सक्षम है, लेकिन छोटे उद्यमियों को ज्यादा दिक्कत हो रही हैं।

टेंडर जारी करने के दो माह बाद भी नहीं बदले गए खंभे और तार
ट्रॉनिका सिटी औद्योगिक क्षेत्र में जर्जर तारों और खंभों को बदलवाने के लिए चार पैकेज का एस्टिमेट तैयार कर दो महीने पहले टेंडर जारी किए थे। जून में डीएम की अध्यक्षता में हुई बैठक में ऊर्जा निगम के अधिकारियों ने दावा किया था कि प्रथम चरण के टेंडर 12 जुलाई को खोलकर जल्द से जल्द काम पूरा करा दिया जाएगा। आईआईए के चेयरमैन का कहना है कि टेंडर खोलने की अवधि को बीते हुए दो महीने बीत गए हैं, अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है।
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जनरेटर से उत्पादन में 40 फीसदी बढ़ जाती है लागत
उद्यमियों का कहना है कि बिजली कटौती के दौरान अगर जनरेटर चलाकर उत्पादन किया जाता है तो उत्पादन लागत करीब 40 फीसदी तक बढ़ जाती है। लोहे को गलाने की फैक्टरियों में उत्पादन की लागत और ज्यादा बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि अगर किसी उद्योग का हर महीने का बिजली खर्च 5 लाख रुपये है तो जनरेटर पर यह बढ़कर 7 से साढ़े सात लाख रुपये पहुंच जाता है। उत्पादन लागत बढ़ने की वजह से उद्यमियों को घाटा हो रहा है।

एक अक्तूबर से और बढ़ जाएगी दिक्कत
आईआईए का कहना है कि एक अक्तूबर से ग्रैप (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) लागू हो जाएगा। इसके बाद डीजल जनरेटर चलाने पर प्रतिबंध लागू हो जाएगा। ऐसी स्थिति में बिजली कटौती न रुकी तो उद्योगों में उत्पादन और प्रभावित हो जाएगा। उद्यमियों के सामने उद्योगों को चलाने का संकट खड़ा हो जाएगा।


बिजली कटौती की वजह से उद्योगाें में उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। बीते दिनों ऊर्जा निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की गई थी। उन्होंने बताया कि जर्जर तार, खंभे, ट्रांसफार्मर बदलने का काम मार्च 2024 से पहले पूरा नहीं हो सकेगा। ट्रॉनिका सिटी, साउथ साइड औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगों को कटौती की वजह से नुकसान उठाना पड़ रहा है।
- राकेश अनेजा, चेयरमैन, आईआईए

फॉल्ट आने के चलते बिजली आपूर्ति प्रभावित हो रही है। जल्द ही पुराने तारों और ट्रांसफार्मरों को बदलवाकर उद्यमियों को निर्बाध बिजली आपूर्ति दी जाएगी। इसके लिए प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय को भेज दिया गया है।
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- नीरज स्वरूप, मुख्य अभियंता, ऊर्जा निगम
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