यूपी सरकार के ड्रीम प्रोजेक्टों में से एक एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट अब अप्रैल 2017 में भी पूरा नहीं हो सकेगा। प्रदेश की इस सबसे लंबी एलिवेटेड रोड पर जुलाई में वाहन फर्राटा भर सकेंगे। यह प्रोजेक्ट करीब छह महीने की देरी से पूरा हो पाएगा। जीडीए ने इस प्रोजेक्ट को समय से पूर्व दिसंबर 2016 में पूरा करने की घोषणा की थी।
1184 करोड की लागत से 10.3 किलोमीटर लंबी रोड राजनगर एक्सटेंशन से यूपी गेट के बीच बनाई जा रही है। इससे दिल्ली और गाजियाबाद की दूरी काफी घट जाएगी। जीडीए अधिकारियों के मुताबिक एलिवेटेड रोड का करीब 80 फीसदी निर्माण पूरा हो चुका है।
228 पिलर के ऊपर बनाई जा रही इस एलिवेटेड रोड के एनएच-24 से कनावनी के बीच वाले भाग में 17 स्पैन रखे जाने बाकी हैं। 3 हिस्सों में बनाई जा रही इस एलिवेटेड रोड का हिंडन बैराज से करहेड़ा पुल तक का भाग पूरा हो चुका है। यहां सभी पिलर्स पर स्पैन रखे जा चुके हैं। यूपी गेट से कनावनी तक 131 पिलर्स खड़े किए जाने हैं, इनमें सिर्फ 17 स्पैन बाकी है।
बाकी बन चुके हैं। जीडीए अधिकारियों का कहना है कि कनावनी से रेलवे ट्रैक के बीच रेलवे की हाईटेंशन लाइन आड़े आ रही है। इस लाइन को रेलवे खुद शिफ्ट करेगा। रेलवे अधिकारियों से वार्ता की जा रही है, जल्द ही इसका काम भी शुरू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि मार्च अंत तक सभी पिलर्स खड़े हो जाएंगे।
एलिवेटेड रोड के पूरा होने पर दिल्ली, नोएडा से गाजियाबाद, मेरठ, देहरादून आने-जाने वाले वाहन चालकों को जाम से नहीं जूझना पड़ेगा।
दो स्थानों पर बनाए जाएंगे रोटरी
एलिवेटेड रोड पर आने-जाने वाले ट्रैफिक के लिए कनावनी पुलिया और करहेड़ा दो स्थानों पर रोटरी (गोल चक्कर) बनाए जाएंगे। कनावनी पुलिया पर इसका डिजाइन अंडाकार आकार में रखा गया है। एलिवेटेड रोड पर वसुंधरा में चढने-उतरने के रास्ते को देखते हुए डिजाइन में परिवर्तन किया गया है। 16.5 लाख की लागत से 290 मीटर की दूरी में रोटरी तैयार होगी।
इस रोटरी से कनावनी पुलिया पर जाम का कोई संकट नहीं रहेगा।
कोट
एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट में लाइन शिफ्टिंग की वजह से देरी हुई है। अप्रैल 2017 की बजाय अब प्रोजेक्ट जून अंत तक पूरा होगा। जिन स्थानों पर कोई अड़चन नहीं हैं वहां निर्माण कार्य तेजी से किया जा रहा है। उम्मीद है कि जुलाई तक इस पर वाहन दौड़ने लगेंगे। - एससी द्विवेदी, चीफ इंजीनियर, जीडीए।