बुलंदशहर जिला पंचायत अध्यक्ष पद अनारक्षित श्रेणी में
बुलंदशहर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण की स्थिति साफ हो गई है। इस बार भी जनपद के जिला पंचायत अध्यक्ष पद की सीट अनारक्षित श्रेणी में है। इसके साथ ही राजनैतिक दल अपने अपने गुणा भाग में लग गए हैं। शासनादेश जारी होने के बाद गहमागहमी का दौर शुरू हो गया है।
शासन की ओर से त्रिस्तरीय चुनाव के लिए सीटों के आरक्षण की सूची शुक्रवार को जारी कर दी गई है। सूची में बुलंदशहर जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट को इस बार भी अनारक्षित कर दिया गया है। गत चार चुनावों के दौरान जिपं अध्यक्ष के आरक्षण को देखा जाए तो वर्ष 2000 में भी जिपं अध्यक्ष की सीट सामान्य में थी। वर्ष 2005 में एससी महिला के लिए आरक्षित थी। वर्ष 2010 के जिला पंचायत चुनाव में यह सीट ओबीसी के लिए आरक्षित थी। जबकि, वर्ष 2015 में सामान्य श्रेणी के लिए आरक्षित थी। साथ ही शासन की ओर से प्रधान पदों के लिए भी आरक्षण चार्ट जारी कर दिया गया है। जिला पंचायत के अपर कार्यकारी अधिकारी विजय शंकर पांडेय ने बताया कि इस बार जनपद का जिला पंचायत अध्यक्ष सामान्य श्रेणी से होगा। आरक्षण सूची जारी हो चुकी है।
जिला पंचायत अध्यक्ष का बीता कार्यकाल काफी उठापटक भरा रहा। इस कार्यकाल में तीन बार जिपं अध्यक्ष बदले। पहले सपा समर्थित हरेंद्र यादव फिर भाजपा समर्थित प्रदीप चौधरी और उनके बाद निर्दलीय चौधरी ओमवीर सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष बने। इसके अलावा तीन बार जिलाधिकारी भी जिला पंचायत के प्रशासक रहे।
गौरतलब है कि 14 जनवरी 2016 को सपा समर्थित हरेंद्र यादव से जिला पंचायत अध्यक्ष बने। प्रदेश में भाजपा की सरकार आने के बाद 29 अगस्त 2017 को भाजपा समर्थित प्रदीप चौधरी ने जिपं की कमान संभाली। प्रदीप चौधरी के कार्यकाल के समय भी जिला पंचायत काफी चर्चाओं में रहा। दो बार उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया। दूसरी बार वह अपनी कुर्सी नहीं बचा पाए और फरवरी 2019 में उन्हें अपना पद गंवाना पड़ा। पांच अगस्त 2019 को निर्दलीय चौधरी ओमवीर सिंह को जिला पंचायत सदस्यों ने अपना अध्यक्ष चुना था।साल 2015 में हुए जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में हरेंद्र यादव, आशा यादव, कदीम फड्डा, चौधरी ओमवीर सिंह, महेंद्र भैया, प्रदीप चौधरी और प्रीती सिरोही अध्यक्ष पद के दावेदारों में शामिल थे।
नंदलाल, जिला पंचायत राज अधिकारी - आरक्षण शासन की ओर से जारी किए गए दिशा-निर्देश के अनुसार ही बनेगा। इसमें किसी तरह की कोताही नहीं बरती जाएगी। इस प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और शासन की मंशानुसार ही पूरा किया जाएगा।