अगले वित्तीय वर्ष (अप्रैल) से प्रदेश की सड़कों पर बीएस-4 वाहन ही दौड़ेंगे। परिवहन विभाग ने इस संबंध में तैयारियां शुरू कर दी है। टू व फोर व्हीलर बनाने वाली कंपनियों को इस बारे में बता दिया गया है। साथ ही अधिकारियों को भी आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए जा रहे हैं।
अप्रैल से शहरवासी स्वच्छ आबोहवा में सांस लेंगे। बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने के लिए प्रदेश शासन स्तर से केवल बीएस-4 वाहन को ही चलाने का निर्णय लिया गया है। एआरटीओ (प्रशासन) विश्वजीत सिंह ने बताया कि प्रदूषण की रोकथाम के लिए शासन ने यह निर्णय लिया है।
आरटीओ में प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में वाहन रजिस्टर्ड होते हैं। यदि रजिस्टर्ड होने वाले वाहन बीएस-4 श्रेणी के होंगे तो वाहनों से निकलने वाला प्रदूषण न के बराबर होगा, क्योंकि दिल्ली-एनसीआर में सबसे ज्यादा प्रदूषण वाहनों से ही होता है।
रजिस्टर्ड वाहनों का आंकड़ा
शहर में दिन-प्रतिदिन वाहनों की संख्या बढ़ती ही गई है। आरटीओ से मिले आंकड़े के मुताबिक 2011 में कुल 70209 वाहन रजिस्टर्ड हुए। इसी प्रकार से 2012 में 69766 वाहन रजिस्टर्ड हुए। 2013 में 66508 वाहन, 2014 में 70060 वाहन, 2015 में 76701 वाहन और 2016 की जनवरी तक 80564 वाहन रजिस्टर्ड हो चुके हैं।
पुराने वाहनों की बिक्री होगी कम
आरटीओ में बीएस-4 वाहनों के रजिस्टर्ड होने से पुराने वाहनों की बिक्री प्रभावित होगी। एआरटीओ विश्वजीत सिंह के मुताबिक पेट्रोल व डीजल के पुराने वाहन तब बिकते हैं जब उनमें कुछ खराबी आ आए या उनकी शासन द्वारा निर्धारित समय सीमा खत्म हो रही हो।
यदि पुरानी पेट्रोल चलित कार की समय सीमा दो या तीन वर्ष ही बची होगी तो उसे कोई नहीं खरीदेगा। वैसे यह नियम नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर ही लागू होगा।