शारदा पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य श्री राज राजेश्वराश्रम जी महाराज ने कहा कि ब्राह्मणों को संगठन को नहीं बल्कि संस्कार की आवश्यकता है। संगठन भेड़ बकरियों का होता है, शेरों का नहीं।
रविवार को जगदगुरु शंकराचार्य श्री राज राजेश्वराश्रम जी महाराज अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा मोदीनगर के तत्वावधान में आयोजित भगवान परशुराम जयंती के मौके पर वर्कर्स क्लब में संबोधन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम ने 27 बार पृथ्वी विजयी की और जीते हुए राज्य को त्याग दिया।
ब्राह्मण त्याग का नाम है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण के आदर्श भगवान हनुमान हैं। वह हनुमान जो राम रूपी धर्म को पूजते हैं। शंकराचार्य ने कहा कि भगवान परशुराम ने सभी क्षत्रियों का संहार नहीं किया। उन्होंने उन्हीं क्षत्रियों का संहार किया, जो धर्म को नहीं मानते थे।
जो धर्म को नहीं मानते भगवान उनको दंड देते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं में संस्कारों की कमी आई है। ब्राह्मण का जन्म खा-पीकर मर जाने के लिए नहीं, एक धर्म विशेष के लिए होता है। उन्होंने कहा कि शस्त्रोविधि से किया गया धर्म कार्य ही फलित होता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे तीर्थ पुष्कर से पधारे डा. स्वामी रामेश्वरानंद महाराज ने कहा कि रोटी, बेटी और चोटी को बचना है। मन को पवित्र करना है तो आहार का शुद्ध होना बेहद जरूरी है। आहार से व्यवहार भी शुद्ध होता है।
शंकराचार्य कृष्ण स्वरूपाचंद महाराज, महामण्डलेश्वर जयस्वरूप महाराज ने कहा कि सनातन धर्म सबसे प्राचीन धर्म है। इस अवसर पर महासभा के संरक्षक रामआसरे शर्मा और कमेटी के पदाधिकारियों ने शंकराचार्यों एवं विश्ष्टि अतिथियों को सम्मानित किया।
नित्य प्रकाश शर्मा, हरवीर शर्मा, मुलतान शर्मा, अनिल शर्मा, गजेंद्र कौशिक, ओमप्रकाश शर्मा, अनिल त्यागी निवाड़ी, जगमोहन शर्मा, ज्ञानी त्यागी, बसंत शर्मा, अशोक शर्मा, रवि कृपाल शर्मा, ओमकुमार शर्मा, केडी शर्मा आदि मौजूद रहे। संचालन विनोद गौड़ ने किया।