प्रदेशभर के सभी सरकारी स्टेडियम में खिलाड़ियों और कोचों की अब बायोमीट्रिक उपस्थिति होगी। खेल विभाग की ओर से पूर प्रदेश में यह व्यवस्था लागू की जाएगी। इस व्यवस्था के शुरू होने से नियमित उपस्थिति अब कोच और खिलाड़ी खेल नहीं कर पाएंगे। साथ ही खिलाड़ी और कोच प्रशिक्षण के समय में भी घालमेल नहीं कर पाएंगे। सुबह-शाम के दोनों ही शिफ्ट में इन और आउट के समय मशीन पर पंच करना होगा।
खेल निदेशालय की ओर से प्रदेशभर से बायोमीट्रिक मशीनों के लिए स्टीमेट मांगा गया है। स्टीमेट मिलने के बाद मशीन लगाने की प्रक्रिया शुरू होगी। पहले चरण में जनवरी में कोचों के लिए व्यवस्था शुरू की जाएगी। इसके बाद दूसरे चरण में ट्रेनी खिलाड़ियों के लिए अप्रैल में व्यवस्था लागू की जाएगी। व्यवस्था के लागू होने से सरकारी स्टेडियम में खिलाड़ी न्यूनतम उपस्थिति से बच नहीं पाएंगे। वहीं कोच भी ट्रेनियों की संख्या में खेल नहीं कर पाएंगे। विभाग में शिकायत रहती है कि कोच न्यूनतम खिलाड़ियों का मानक पूरा करने के लिए ज्यादा संख्या दर्शाते हैं। प्रशिक्षण में कोच को पूरा समय खिलाड़ियों को देना होगा।
80 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य
खेल विभाग में पंजीकृत खिलाड़ियोें के लिए न्यूनतम 80 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है। वर्तमान में मैनुअल उपस्थित होती है। इससे ज्यादातर खिलाड़ी बच जाते हैं। अब स्टेडियम के कोचों से प्रशिक्षण लेेने और दूसरी सुविधाओं के लिए खिलाड़ियों को नियमित स्टेेडियम में आना होगा। वहीं स्टेडियम में सुबह और शाम की शिफ्ट में प्रशिक्षण होता है। सुबह छह से नौ बजे तक प्रैक्टिस होती है। जबकि शाम को तीन बजे से छह बजे तक प्रैक्टिस होती है। इन दोनों ही शिफ्ट में आते और जाते समय खिलाड़ियों और कोच को बायोमीट्रिक मशीन पर पंच करना होगा।
कोचों के गायब होने पर लगेगी लगाम
स्टेडियम से कोचों के गायब होने की बड़ी समस्या है। कोचों के पूरा समय नहीं देने की भी पुरानी समस्या है। कई कोच देर से आते हैं या जल्दी चले जाते हैं। बायोमीट्रिक सिस्टम लागू होने से वो अब ऐसा नहीं कर पाएंगे, जिसका फायदा खिलाड़ियों को मिलेगा।
विभाग की ओर से बायोमीट्रिक मशीनों केलिए स्टीमेट मांगा गया है। निदेशालय से निर्देश के बाद व्यवस्था लागू की जाएगी। - गदाधर बारीकी, जिला क्रीड़ा अधिकारी