मंच से किसानों को संबोधित कर भाकियू नेता राकेश टिकैत ने कहा कि आंदोलन को छह माह पूरे हो गए। यदि अभी भी सरकार किसानों से बात नहीं करती तो इससे साफ है कि आंदोलन अब लंबा चलेगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन का क्या हश्र होगा, यह नहीं पता
केंद्र के तीन कृषि कानून के खिलाफ आंदोलन को छह माह पूरे होने पर बुधवार को किसानों ने यूपी गेट पर काला दिवस मनाया। इस बीच किसानों ने बैरिकेड, लंगर और तंबुओं पर काले झंडे बांधकर और काली पगड़ी व काली पट्टी बांधकर विरोध किया।
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इससे पहले किसानों ने भगवान बुद्ध की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर बुद्ध पूर्णिमा बनाई। वहीं केंद्र सरकार का पुतला फूंकने के दौरान पुलिस अधिकारी और किसानों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। उधर, भाकियू नेता राकेश टिकैत ने सरकार को कोरोना काल में चुप्पी साधने पर जमकर घेरा।
मंच से किसानों को संबोधित कर भाकियू नेता राकेश टिकैत ने कहा कि आंदोलन को छह माह पूरे हो गए। यदि अभी भी सरकार किसानों से बात नहीं करती तो इससे साफ है कि आंदोलन अब लंबा चलेगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन का क्या हश्र होगा, यह नहीं पता। लेकिन इतना पता है कि आंदोलन असफल हुआ तो सरकार मनमर्जी करेगी।
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आंदोलन सफल रहा तो किसानों की आने वाली पीढ़ियों को इसका लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि किसान कभी भी सरकार के पुतले फूंकने में विश्वास नहीं रखता था। मगर अब सरकार ने मजबूर कर दिया। तीन कानूनों को रद्द करने के लिए काला दिवस सिर्फ यूपी बॉर्डर पर ही नहीं, बल्कि पूरे देश में काले झंडे लगाकर विरोध हुआ।
कोरोना पर सरकार को घेरते हुए राकेश टिकैत ने पूछा कि क्या कोरोना बीमारी बड़ी है या फिर तीन कृषि कानून। यदि बीमारी बड़ी है तो सरकार कानूनों को रद्द कर किसानों को उनके घर वापस क्यूं नहीं जाने दे रही। कोरोना तो एक बहाना है, जिससे यह कानून बने रहे।
किसानों को संबोधन में कहा कि जब कृषि कानून कोरोना काल में बन सकता है तो फिर इसे रद्द करने में क्या दिक्कत आ रही है। उन्होंने कोरोना काल में फैली अव्यवस्था पर भी सरकार को घेरा। कहा कि ऑक्सीजन सिलिंडर 20,000 और 2000 रुपये कीमत वाला इंजेक्शन 40 हजार में मिला।
इस तरह भोली भाली जनता को लूटने वाले लोगों को खुली छूट दी गई। सरकार को कड़े शब्दों में कहा कि आंदोलन वर्ष 2024 तक चलता रहेगा। किसानों से भी अपील की कि सरकार के दिमाग से किसान शब्द नहीं हटना चाहिए। जब तक तीन कानून रद्द नहीं होंगे। आंदोलन स्थल से किसान अपने घर नहीं जाएगा।
सरकार की चुप्पी पर निशाना साधकर कहा कि पिछले छह महीने से किसानों से राजधानी को घेरा हुआ है। लेकिन इतने दिनों से सरकार चुप है, वार्ता करने को तैयार नहीं है। जबकि किसानों ने वार्ता के लिए पत्र भी लिखा हुआ है। अब सरकार चुप्पी तोड़े और किसानों से बात करे। क्योंकि किसान भी यहीं है, ट्रैक्टर भी यहीं है और आंदोलन भी चलेगा।
अधिकारियों के चेतावनी दी कि यदि अब बिजली पानी काटी तो फिर किसान अधिकारियों के क्षेत्र में बिजली कनेक्शन काटेंगे। किसान अबकी बार इलाज करके रहेगा। बंगाल की तरह यहां भी नतीजे आएंगे तो सरकार को होश आएगा।
पीएसी समेत भारी पुलिस बल आंदोलन स्थल पर रहा तैनात
मंगलवार रात से ही पुलिस प्रशासन अलर्ट हो गया था। रात में ही सौ पुलिस कर्मियों की डयूटी लगाई गई थी। यह सभी पुलिस कर्मी सादे कपड़ों में आंदोलन स्थल पर तैनात रहे। जनपद के अन्य थानों से भी पुलिस बुलाई गई थी।
दिनभर एडीएम शैलेंद्र सिंह, एसीएम विनय सिंह सहित सीओ इंदिरापुरम अंशु जैन व अन्य आलाधिकारी बार्डर पर मौजूद रहे। एसपी ट्रांस हिंडन ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि एहतियातन भारी सुरक्षा-व्यवस्था में पुलिस व पीएसी बल तैनात था।