‘सुनी ना अरजिया हमार, ए छठी मईयां..., कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए....’आदि छठ मईया के गीत और सर पर टोकरी लिए, नंगे पांव गाजे-बाजे के साथ श्रद्धालु घाट पर पहुंचे। गंदगी और भारी अव्यवस्था के बावजूद श्रद्धालुओं ने रविवार को हिंडन घाट पर सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया। हर साल से इस बार श्रद्धालुओं की संख्या कम रही।
सूर्य पूजा का महा पर्व छठ पूजा पर डूबते सूर्य को जल देने के लिए लाखों श्रद्धालु हिंडन घाट पहुंचे। छठ मईया का पूजन कर दोपहर तीन बजे से ही कई श्रद्धालु बीच पानी में खड़े होकर सूर्य की उपासना करते और सूर्यास्त होने का इंतजार किया।
महिलाओं और पुरुषों ने छठी मईया की पूजा फूल-अक्षत, फल, ठेकुआ-पूड़ी, चना आदि से पूजा की। उसके बाद सूप में फलों,पकवानों और नारियल को रखकर हल्दी-आटे के लेप और सिंदूर से पूजा कर सूप के साथ सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया।
छठ पर्व करने वाली अर्चना ने बताया कि अपने सामर्थ्य के अनुसार पांच, सात या ग्यारह सूप से सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया जाता है। कई श्रद्धालुओं ने घाट पर कोसी भरकर छठ मईया के गीत गए। सोमवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पूजा का समापन होगा।
रिश्तों को सहेजता महापर्व
घंटाघर से आए छठ व्रती सीमा देवी ने बताया कि घर में बेटा होने पर या कोई मन्नत पूरी होने पर कोसी भरने की प्रथा है। इसमें गन्ने का मंडप बनाकर दीयों से सजाते हैं और फल, ठेकुआ, पूड़ी और अखंड दीया जलाते हैं उसी कोसी को घर ले जाकर वहां भी पूजा कर गीत आदि गाते हैं। कई लोग मन्नत मांगते हैं कि अगर बेटा हुआ तो गाजे-बाजे के साथ छठ घाट पहुंचेंगे और कोसी भरेंगे।
सोसाइटीज में स्वीमिंग पूल और अस्थाई घाट पर हुई पूजा
शहर में हिंडन घाट के अलावा संजयनगर, विजनयनगर, प्रताप विहार, नंदग्राम आदि जगहों पर भी छठ पूजा की गई। संजनयगर सेक्टर-23 के स्वीमिंग पूल में लोगों ने सूर्य भगवान को जल दिया।
राजनगर एक्सटेंशन के रिवर हाइट्स में, क्रासिंग के गोल्फ लिंक, स्काइटेक फेज-2, केडीबी ग्रैंड सवाना, आशियाना, एसजी इंप्रेशन सहित अन्य सोसाइटीज में स्विमिंग पूल में पूजा हुई। इसके अलावा विजयनगर के रामलीला ग्राउंड में भी अस्थाई तालाब बनाकर सजावट आदि करकेव्रतियों ने वहां पूजा-अर्चना की।
क्रासिंग रिपब्लिक के गोल्फ कोर्स में अस्थाई घाट बनाया गया, जहां भक्तों ने पूजा की। इसमें छठ पूजा समिति के पीएन सिंह, बीपी भाटिया, विवेक शर्मा, आशुतोष चंदन, निरंजन गुप्ता, अनुरंजन श्रीवास्तव, अंजू श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
गंदगी और बीच से चलकर आए व्रती
छठ घाट पर इस बार अव्यवस्थाओं की अंबार रहा। व्रतियों ने भी बताया कि इस बार जितनी अव्यवस्था कभी नहीं रही। छठ व्रती गंदगी से होकर जल में अर्घ्य देने पहुंचे और जो पानी थी उसमें भी गंदगी ही गंदगी तैर रही थी।
नंदग्राम के निवासी अशोक श्रीवास्तव ने बताया कि गाजियाबाद में पूरब के लोगों की काफी उपेक्षा है। प्रशासन से लेकर नगर-निगम और नेतागण भी साल में एक बार होने वाले पूर्वांचल के इतने महत्वपूर्ण उत्सव की तरफ कोई ध्यान नहीं देते। इसके अलावा जो छठ पूजा समितियां भी हैं वह भी सिर्फ दिखावे के लिए बनी हुई हैं।
मन्नत पूरी होने पर जमीन पर लेट कर पहुंचे घाट
छठ घाट पर कई ऐसे श्रद्धालु पहुंचे जो छठ घाट तक जमीन पर लेट-लेट कर आए। घूकना की विमला नाम की लड़की ने अपनी मां की असाध्य बीमारी ठीक हो जाने की मन्नत मांगी थी।
मां के ठीक होने के बाद से वह छठ व्रत करने लगी है और मेरठ रोड से हिंडन घाट तक लेट-लेट कर पहुंची उसके बाद नदी में स्नान कर सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया। इसके अलावा सीमापुरी, बजरिया, मेरठ रोड अर्थला आदि से भी ऐसे श्रद्धालु पहुंचे।