मामला लोनी क्षेत्र की रहने वाली एक महिला और विजयनगर निवासी उसके पति से जुड़ा है। दोनों की शादी करीब पांच वर्ष पहले हुई थी। शुरुआत में दोनों का वैवाहिक जीवन सामान्य रूप से चल रहा था, लेकिन समय के साथ पत्नी के ब्यूटी पार्लर संचालन को लेकर मतभेद शुरू हो गए।
पत्नी के अनुसार, ब्यूटी पार्लर उसकी आय का साधन है। इसे वह किसी भी परिस्थिति में बंद नहीं करना चाहती। पति को पत्नी का यह काम पसंद नहीं है और वह लगातार पार्लर बंद करने की मांग कर रहा था। इसी मुद्दे पर घरेलू कलह की स्थिति बन गई।
विवाद बढ़ने पर महिला ने ससुराल छोड़ दिया और मायके में रहने लगी। बाद में उसने पति के खिलाफ उत्पीड़न का मामला अदालत में दायर किया। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने समझौते की संभावना तलाशने के लिए मामले को मध्यस्थता केंद्र भेजा।
मध्यस्थता केंद्र में दोनों पक्षों की अलग-अलग और संयुक्त काउंसिलिंग की गई, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। महिला अपने रोजगार को जारी रखने के फैसले पर अडिग रही, जबकि पति ने स्पष्ट किया कि पत्नी के पार्लर बंद किए बिना वह साथ रहने को तैयार नहीं है। दोनों के अपने-अपने रुख पर कायम रहने के कारण मध्यस्थता प्रक्रिया विफल रही। समझौता नहीं होने के बाद प्रकरण को दोबारा अदालत भेज दिया गया है।