शनिवार को कैश बदलने और लेने के लिए सिर्फ बुजुर्गों को प्राथमिकता मिलने के दावे बैंकों की बदइंतजामी के आगे ढेर हो गए। शहर के इक्का दुक्का बैंकों को छोड़ दें तो ज्यादातर बैंकों के बाहर दो लाइनें लगी थीं और दोनों में हर उम्र के लोग खड़े थे। इससे बुजुर्गों में भारी रोष भी दिखा। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कई बुजुर्गों ने सुझाव भी दिए।
शनिवार को संजय नगर, पटेल नगर, आरडीसी, अंबेडकर रोड, शास्त्रीनगर, कविनगर स्थित बैंकाें के बाहर सीनियर सिटीजंस की अलग लाइन लगी थी। लेकिन नवयुग मार्केट स्थित अधिकांश बैंकाें के बाहर अव्यवस्था का माहौल था।
यहां पर लोगों की दो लाइनें लगी हुई थीं, जिसमें सभी उम्र के लोग कैश निकालने और जमा कराने के लिए खड़े थे। लीड डिस्ट्रिक मैनेजर आरएस मीणा ने बताया कि लिमिट घटने और उंगली पर स्याही का निशान लगने के बाद से रुपये बदलने वालों की भीड़ में कमी आई है। अब भीड़ ज्यादातर उन लोगों की है, जोकि बंद हो चुके 1000-500 के नोटों को जमा कराने बैंक पहुंच रहे हैं।
नए नोट पर न कुछ लिखें, न चित्र बनाएं
बैंक अधिकारियों ने बताया कि 2000 और 500 के नए नोट पर न तो कुछ लिखें और न ही कोई चित्र आदि बनाएं। ऐसे नोट बैंक में स्वीकार नहीं किए जाएंगे। ऐसा करना कानूनन जुर्म है।
आदत के मुताबिक कुछ लोग इस नोट पर भी कुछ न कुछ लिखेंगे। ऐसे लोगों को सचेत करने के लिए कड़े कदम उठाना जरूरी है। नोट पर कुछ भी लिखा तो वह चलन में भले ही रहे लेकिन उसे बैंक वापस नहीं लेगा।
केबल ऑपरेटर 24 नवंबर तक करे टैक्स जमा
जनपद के सभी केबल ऑपरेटर अक्तूबर माह का मनोरंजन टैक्स 24 नवंबर तक हर हालत में जमा करें। मनोरंजन कर उपायुक्त एचएन शुक्ला ने बताया कि नोट बंदी के बाद से विभाग का रेवेन्यू काफी गिरा है।
रेवेन्यू लेने के लिए कठोर कदम उठाने पड़ रहे हैं। जनपद में 200 से ज्यादा केबल ऑपरेटर हैं। प्रतिमाह लाखों रुपये इनसे टैक्स मिलता है। नोट बंद होने के बाद से ही ऑपरेटरों ने टैक्स जमा नहीं किया है।
यदि कोई ऑपरेटर सरकारी धन को रोकता है तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। दूसरी ओर मल्टीप्लेक्स का कारोबार भी इससे 50 प्रतिशत तक कम हुआ है। लोग मल्टीप्लेक्स में फिल्में देखने के लिए नहीं आ रहे।
समय से पहले कई बैंकाें में कैश खत्म
शहर के अधिकांश बैंकाें में समय से पहले ही कैश खत्म हो जा रहा है। आरडीसी स्थित एचडीएफसी बैंक, नवयुग मार्केट स्थित बैंक ऑफ इंडिया, युनाइटेड बैंक, यूनियन बैंक के साथ कई प्राइवेट बैंकाें में डिमांड ज्यादा होने के कारण कैश समय से पहले ही खत्म हो जाता है।
इससे लोगों को काफी दिक्कतें होती हैं। लोग घंटों लाइन में खड़े होकर इंतजार करते हैं। जब तक उनका नंबर आता है तब तक बैंक अधिकारी कैश खत्म होने का एनाउंसमेंट कर देते हैं। इसका विरोध भी होता है लेकिन बैंक अधिकारी अपनी मजबूरी बताते हैं।
500 के नोट की कमी से जूझ रहे दुकानदार
मार्केट में दुकानदार 500 के नोट की कमी से जूझ रहे हैं। जब से 500 व 1000 के नोट बंद किए गए हैं, उसके बाद से 500 के नए नोट नहीं आए हैं। किराना व्यापारी संदीप बंसल ने बताया कि अधिकांश लोग के पास 2000 के नोट आ चुके हैं।
यदि वह बाजार में किराने का सामान लेने आ रहे हैं तो दुकानदार बाकी बचा फुटकर पैसे कहां से दें। बैंक जल्द से जल्द 500 के नए नोट का फ्लो बढ़ाए। तभी व्यवस्था संभालेगी।
क्या कहते हैं सीनियर सिटीजन
सीनियर सिटीजन की अलग लाइन लगने से फायदा मिला है। पहले तो एक ही लाइन में खड़े-खडे़ काफी परेशानी होती थी। सभी के सामने ये समस्या है। इसलिए बैंक वाले भी छूट नहीं दे रहे थे। -मदन लाल, कविनगर
- सरकार ने कैश बदलने की लिमिट कम करके गलत किया है। बुजुर्गों की तबीयत खराब रहती है। ऐसे में वह बार-बार लाइन में खड़े नहीं हो सकते। -किशन लाल, नेहरू नगर
- 93 वर्षीय पुष्पावती का कहना है कि नोट बंद करने के बाद से बुजुर्गों की परेशानी बढ़ गई है। यदि किसी को पेंशन भी निकालनी है तो वह भी लाइन में लगेगा।
कैश की किल्लत, बुजुर्ग खाली हाथ लौटे
केनरा बैंक में दोपहर बाद कैश खत्म हो गया। प्रबंधक द्वारा गेट पर इसकी सूचना भी चस्पा कर दी गई मगर उसके बाद भी लोग लाइन में खड़े रहे । हारकर प्रबंधक गेट पर आए और लोगों से हाथ जोड़कर घर जाने का कहा । उन्होंने कहा कि जितना पैसा बैंक में था वह सब बांट दिया गया।
कई बैंकों में सुबह से ही केवल रुपये जमा कराए गए
कई बैंकों में केवल कैश ही जमा किया गया। सरकार की घोषणा के चलते बुजुर्ग और शादी वाले कई लोग बैंकों में पहुंचे मगर कैश नहीं होने पर निराश लौट गए। संतपुरा निवासी प्रदीप की बेटी की शादी दो दिसंबर की है।
वह शादी का कार्ड लेकर गोविंदपुरी स्थित सिंडीकेट बैंक पहुंचा मगर कैश नहीं मिला। वहीं कई बुजुर्ग इलाहाबाद बैंक पहुंचे मगर वहां भी कैश नहीं होने की बात कहीं गई।