गण्पती बप्पा मोर्या... हिंडन नदी में श्री गणेश जी का ढोल बाजे के साथ झूमते नाचते विसर्जन करते श
साहिबाबाद। गणपति विसर्जन के अवसर पर रविवार को श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर दिखाई दिया। सुबह से ही शहर की गलियों और चौकों पर ढोल-नगाड़ों की थाप गूंजती रही और भक्त बप्पा के जयकारों के साथ झूमते-नाचते नजर आए। हर तरफ गुलाल उड़ता रहा और माहौल भक्ति और उल्लास से सराबोर हो गया।
जगह-जगह से निकली शोभायात्राओं में महिलाओं और बच्चों सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इस दौरान भक्त बप्पा की प्रतिमाओं को गाजे-बाजे के साथ नदी तट तक लेकर पहुंचे और परंपरा के अनुसार जल में विसर्जन किया। अर्थला से विसर्जन करने आए दिनेश मांझी ने बताया कि उनके यहां गणेश चतुर्थी के दिन बप्पा की प्रतिमा की स्थापना की गई थी। इसके बाद बप्पा की प्रतिमा का विधिपूर्वक पूजन किया गया। उन्होंने बताया कि चौथे दिन बप्पा की प्रतिमा को परंपरागत रूप से विसर्जन करने के लिए वह हिंडन नदी के पास लाए और विसर्जित किया।
नियमों को ताक पर रखकर नदी में हो रहा विसर्जन
जहां एक ओर भक्ति के रंग में डूबे भक्तों ने पर्यावरण का ध्यान रखते हुए निगम की ओर से बनाए गए तालाब में मूर्ति को विसर्जित किया। तो वहीं दूसरी ओर इस उत्सव के बीच नियमों की अनदेखी भी साफ झलकी। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेशों के बावजूद श्रद्धालुओं ने सीधे नदी में ही प्रतिमाओं का विसर्जन किया। सुरक्षा और रोकथाम के लिए लगाई गई बैरिकेडिंग को लोगों ने हटा दिया और नदी के भीतर तक पहुंच गए। पूजा सामग्री और फूल-मालाएं भी नदी में प्रवाहित कर दी गईं। लापरवाही का आलम ऐसा रहा कि इस दौरान नदी के आसपास विभाग का कोई कर्मचारी नहीं मौजूद रहा।