गाजियाबाद। नंदग्राम थाना क्षेत्र में दो सगे मासूम भाइयों के साथ यौन शोषण के मामले में गिरफ्तार 65 वर्षीय आरोपी राजकुमार को पॉक्सो अदालत से एक बार फिर राहत नहीं मिली। अदालत ने उसकी जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा कि मामले की विवेचना पूरी हो चुकी है और पुलिस आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। उपलब्ध साक्ष्यों तथा पीड़ित बच्चों के बयानों के आधार पर इस स्तर पर आरोपी को जमानत देना न्यायहित में उचित नहीं होगा।
अभियोजन के अनुसार छह और सात वर्ष के दोनों भाई 31 मई 2026 की शाम घर के बाहर खेल रहे थे। आरोप है कि पड़ोस में रहने वाला राजकुमार उन्हें अपने घर ले गया, जहां उसने बच्चों को धमकाकर उनके साथ यौन शोषण किया। आरोप है कि वह इससे पहले भी दोनों बच्चों का शोषण कर चुका था। घटना के बाद दर्ज मुकदमे में पुलिस ने आरोपी को दो जून 2026 को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी निर्दोष है और उसे झूठा फंसाया गया है। यह भी कहा गया कि वह 65 वर्ष का बुजुर्ग है, उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है तथा वह उच्च रक्तचाप और हृदय रोग से पीड़ित है। बचाव पक्ष ने प्राथमिकी दर्ज कराने में हुई देरी का भी उल्लेख किया। अभियोजन ने जमानत का विरोध करते हुए अदालत को बताया कि दोनों पीड़ित बच्चों ने अपने बयानों में आरोपी के खिलाफ स्पष्ट आरोप लगाए हैं। साथ ही आशंका जताई कि जमानत मिलने पर आरोपी गवाहों को प्रभावित कर सकता है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि आरोपी की पहली जमानत अर्जी भी आठ जुलाई 2026 को खारिज हो चुकी है। अब विवेचना पूरी होने और आरोपपत्र दाखिल होने के बाद उपलब्ध साक्ष्य, पीड़ितों के बयान, अपराध की गंभीरता तथा उसके सामाजिक प्रभाव को देखते हुए आरोपी को जमानत पर रिहा करना उचित नहीं है।