गाजियाबाद। नंदग्राम थाना क्षेत्र में खनन अधिकारी सौरभ चतुर्वेदी के सरकारी वाहन में बागपत के पासर गैंग ने दो हाईटेक मैग्नेटिक जीपीएस डिवाइस लगाए थे। उत्तराखंड से शामली, बागपत और गाजियाबाद से निकलने वाली यमुना नदी में ग्रैप तीन के चलते हो रहे खनन को रोकने के लिए एनजीटी ने 20 नवंबर 2025 को जांच के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) और गाजियाबाद खनन अधिकारी की एक संयुक्त समिति का गठन किया था। इसका उद्देश्य लोनी क्षेत्र में यमुना में हो रहे खनन को रोकना था। बागपत के पासर गैंग ने खनन माफिया के कहने पर खनन अधिकारी की लोकेशन ट्रेस करने के लिए दो हाईटेक मैग्नेटिक जीपीएस लगाए थे।
डीसीपी सिटी धवल जायवाल ने बताया कि यह गैंग पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाल फिलहाल में सक्रिय हुआ है। पासर गैंग उत्तराखंड, शामली, बागपत और गाजियाबाद में तैनात खनन अधिकारियों की लोकेशन खनन माफिया को देता है। इसकी एवज में खनन माफिया से मोटी रकम भी वसूलता है। सीसीटीवी और लोकल इनपुट से दोनों आरोपियों की पहचान कर ली गई है। आरोपी हरेंद्र धामा पुत्र इंद्रपाल निवासी शाहवाली गली खेकड़ा थाना खेकड़ा बागपत और उसका साथी अभिनव निवासी अज्ञात की पहचान हो चुकी है। हालांकि, पुलिस ने जब इन्हें गिरफ्तार करने का प्रयास किया तो उससे पूर्व ही दोनों आरोपी अग्रिम जमानत पा चुके थे। अग्रिम जमानत की अवधि पूर्ण होने पर बागपत के आरोपियों से पूछताछ की जाएगी। बताया कि एनजीटी ने पाया कि ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप)- तीन लागू होने के दौरान एनसीआर क्षेत्र में सभी खनन गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध था लेकिन इस अवधि में भी खनन कार्य जारी रहा। संयुक्त समिति ने उत्तर प्रदेश के खनन विभाग, यूपीपीसीबी व गाजियाबाद जिला प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई करने और यमुना नदी की मुख्य धारा में किसी भी प्रकार का खनन रोकने की सिफारिश की है। लोनी क्षेत्र में यमुना में होने वाले खनन को रोकने के लिए यह समिति गठित की गई थी।
यह था मामला
25 मार्च को नंदग्राम थाना क्षेत्र की एक सोसायटी में खड़े खनन अधिकारी सौरभ चतुर्वेदी के सरकारी वाहन में दो हाईटेक मैग्नेटिक जीपीएस डिवाइस चिपके मिले थे। इनमें एक्टिव सिम कार्ड लगे थे। इन डिवाइस के जरिये वाहन की लोकेशन ट्रैक की जा रही थी। इससे खनन विभाग की रेड और कार्रवाई की जानकारी पहले ही माफिया तक पहुंच सके।
एनजीटी ने दर्ज किए प्रमुख उल्लंघन
-यमुना नदी की मुख्य धारा में लगभग 110 मीटर अंदर तक खनन।
-नदी तट पर अवैध रैंप का निर्माण।
-सीमा स्तंभों का लुप्त या जल में डूब जाना।
-भारी मशीनों से 15–20 फीट तक खुदाई।
-वृक्षारोपण, पर्यावरण आडिट व छह मासिक अनुपालन रिपोर्ट का अभाव।
-रात्रिकालीन खनन के साक्ष्य।
-अनुमत क्षमता से अधिक डीजी सेट का उपयोग।
-अपशिष्ट जल प्रबंधन व बुनियादी ढांचे में गंभीर कमी।
डीसीपी सिटी धवल जायसवाल का कहना है कि खनन अधिकारी की गाड़ी में जीपीएस लगाने वालों को ट्रेस कर लिया गया है। फिलहाल दो आरोपियों की पहचान हो चुकी है। इन्होंने अग्रिम जमानत पा ली है। जल्द ही इनसे पूछताछ कर गिरोह का खुलासा किया जाएगा।