बिहार की बस मिलने की उम्मीद में नांगलौई से पैदल इंदिरापुरम पहुंचे 32 मजदूर, आरडब्ल्यूए बनी सहारा - भूख और प्यास के कारण सोसायटी के बाहर बेसुध पड़े थे मजदूर - पदाधिकारी ने वीडियो के जरिए प्रदेश सरकार से ट्रांसपोर्टेशन व्यवस्था कराने की की मांग माई सिटी रिपोर्टर
साहिबाबाद। लॉकडाउन-3 में गरीब और मजदूरों को खाने-पीने के इंतजाम करने के प्रशासन के तमाम दावे शनिवार को खोखले नजर आए। बिहार जाने के लिए दिल्ली के नांगलौई इलाके से पिछले चार दिनों से पैदल चल रहे 32 मजदूर शनिवार सुबह इंंदिरापुरम की आम्रपाली विलेज सोसायटी के बाहर बेसुध हो गए।इसकी सूचना मिलते ही आनन फानन में आरडब्ल्यूए ने उन सभी को चाय-नाश्ता कराया। आरोप है कि मामले की सूचना पुलिस को मिलते ही तमाम मजदूरों को पुलिस ने 144 धारा का हवाला देकर बिना खाना खाएं वहां से वापस भेज दिया।
आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष दीपक कुमार ने बताया कि नांगलौई दिल्ली से करीब 32 मजदूर बिहार जाने के लिए पैदल ही चल रहे थे। उन्हें बार-बार नोएडा से दिल्ली और फिर गाजियाबाद भेजा जा रहा था। बातचीत में पता चला कि पिछले चार दिनों से सभी मजदूर बिना कुछ खाए-पिए चलते जा रहे थे। इस वजह से शनिवार सुबह सोसायटी के गेट पर आकर सभी बेसुुध होकर जमीन पर पड़े थे। इसकी सूचना मिलते ही आरडब्ल्यूए के लोग मौके पर पहुंचे और सोशल डिस्टेंसिंग बनाते हुए मास्क व ग्लब पहनकर सभी को उठाकर सोसायटी के अंदर बैठाया। इसके बाद उनको चाय नाश्ता कराया। पदाधिकारियों ने मानवीय तौर पर सभी लोगों के लिए खाने का इंतजाम किया। लेकिन इससे पहले ही कुछ लोगों ने कोरोना संक्रमण फैलने की आशंका पर पुलिस को सूचना दे दी। पदाधिकारियों का कहना है कि मौके पर पहुंची पुलिस ने धारा-144 का हवाला देकर सभी लोगों को वापस दिल्ली भेज दिया। इस बीच कोई भी व्यक्ति खाना भी नहीं खा सका था। आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों ने इसका विरोध किया और ट्विटर के जरिए अपनी अपनी शिकायत शासन तक पहुंचाई। इस बीच लोगों ने 32 मजदूरों के लिए सरकार से ट्रांसपोर्टेशन का इंतजाम भी करने की मांग की थी। आरडब्ल्यूए की तरफ से माहेश्वरम नैयर, सोनू मल्होत्रा आदि मौजूद रहे। ---------------------- सुमित कुमार