खुद को राज्य कर अधिकारी का सहयोगी बताने वाले एक युवक को मेरठ एंटी करप्शन टीम ने पांच हजार रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी लोकेश कुमार ने एक फर्म को जारी नोटिस खत्म कराने के एवज में यह रिश्वत मांगी थी। उसे राज्य कर विभाग के बाहर एक चाय की दुकान से पकड़ा गया। यह कार्रवाई बृहस्पतिवार दोपहर को की गई।
शिकायतकर्ता संजीव कुमार शर्मा की शिकायत पर टीम ने यह जाल बिछाया था। संजीव कुमार क्रॉसिंग रिपब्लिक क्षेत्र स्थित आरएल इंटरप्राइज की प्रबंधक रुचि शर्मा के पति हैं। संजीव कुमार के अनुसार, उनकी कंपनी ने वर्ष 2022-23 में कर जमा किया था। विभाग की ओर से उन्हें एक नोटिस मिला था, जिसमें 13 हजार रुपये कम कर जमा होने की बात कही गई थी। लोकेश कुमार ने संजीव कुमार से संपर्क किया और नोटिस खत्म कराने के लिए 15 हजार रुपये की मांग की। बातचीत के बाद पांच हजार रुपये देने पर सहमति बनी थी। पूछताछ में लोकेश ने बताया कि वह राज्य कर अधिकारी खंड 11 के सहयोगी के रूप में निजी तौर पर काम करता है। आरोपी को कविनगर थाने में सौंप दिया गया है।
रिश्वत की मांग और शिकायत
संजीव कुमार शर्मा ने बताया कि कर विभाग से नोटिस मिलने के बाद लोकेश कुमार ने उनसे संपर्क साधा था। लोकेश ने नोटिस रद्द कराने के लिए 15 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। लंबी बातचीत के बाद यह राशि पांच हजार रुपये तय हुई। संजीव कुमार ने इस मामले की शिकायत एंटी करप्शन टीम में दर्ज कराई थी।
एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई
शिकायत मिलने के बाद मेरठ एंटी करप्शन टीम ने योजना बनाई। बृहस्पतिवार दोपहर टीम शिकायतकर्ता के साथ कचहरी स्थित राज्य कर विभाग पहुंची। लोकेश ने संजीव कुमार को रिश्वत के पांच हजार रुपये लेने के लिए विभाग के बाहर चाय की दुकान पर बुलाया। जैसे ही संजीव कुमार ने लोकेश को रिश्वत दी, टीम ने उसे रंगेहाथ पकड़ लिया। निरीक्षक दुर्गेश कुमार ने कविनगर थाने में आरोपी के खिलाफ तहरीर दी है।