लोगों का कहना है कि अंतिम संस्कार करने के बाद लोग तो वहां से चले जाते हैं, लेकिन हवा के साथ राख उड़कर उनके घरों तक पहुंच रही है। आरोप है कि पूरे दिन हवा के साथ राख के कण गांव में पहुंच रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के डिबाई में आठ हजार की आबादी वाले गांव किनारे बसे राजघाट बांगर के ग्रामीण इन दिनों महामारी के साथ एक अन्य समस्या से जूझ रहे हैं। गंगा किनारे प्रतिदिन औसतन 30 से 40 शवों के अंतिम संस्कार से ग्रामीण खासे परेशान हैं। चिता की राख उड़कर लोगों के घरों तक पहुंच रही है। लोगों ने मांग की है कि गंगा किनारे अंतिम संस्कार करने पर रोक लगाई जाए।
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लोगों का कहना है कि अंतिम संस्कार करने के बाद लोग तो वहां से चले जाते हैं, लेकिन हवा के साथ राख उड़कर उनके घरों तक पहुंच रही है। आरोप है कि पूरे दिन हवा के साथ राख के कण गांव में पहुंच रहे हैं। शाम के समय चूल्हे पर खाना बनाने के दौरान सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि क्षेत्र में कोई मौत होती है तो वहां के लोग घरों से उपले ले जाकर श्मशान घाट पर ही अंतिम संस्कार करते हैं। जबकि आगरा, अलीगढ़, मथुरा समेत अन्य जिलों के अधिकतर लोग लकड़ियां साथ लेकर आते हैं।
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दस फीसदी लोगों की भी नहीं हुई कोरोना जांच
तमाम स्वास्थ्य सेवाएं देने का दम भरने वाला स्वास्थ्य विभाग महामारी के इस दौर में भी राजघाट बांगर गांव की कुल आबादी के दस फीसदी लोगों का भी अभी तक कोविड टेस्ट नहीं कराया जा सका है। लगातार गांव में लोगों की मौत होने के कारण अब लोग घरों से बाहर निकलने में भी डर रहे हैं। हालांकि बड़ी संख्या में लोगों का पेशा खेतीबाड़ी से जुड़ा होने के कारण घरों से निकलना उनकी मजबूरी हो गया है। ग्रामीणों ने गांव में शिविर लगाकर जांच करने की मांग की है। गांव में एक महीने में करीब दस लोगों की मौत हो चुकी है।
इन लोगों की हुई मौत
कन्हैया सक्सेना
सावित्री देवी
भागीर थपड़ा
कालीचरन
जगदीश
दूडी प्रसाद
रामप्रसाद
सुखराम
भगवती देवी
रतनपाल
इन गांवों के हालात भी हैं खराब
गांव का नाम मौत
कुंवरपुर 07
राजौर 09
कैलावन 18
परवाना 17
कनौना 14
दौलतपुर कलां 18
बरहाना 07
इछावरी 14
नैथला 17
खेलिया कल्यानपुर 05
घर में रहना हो रहा मुश्किल
गांव में एक तो महामारी के कारण लोगों मे दहशत है दूसरी ओर गंगा घाट पर अधिक शवों के अंतिम संस्कार होने के कारण राख उड़कर घरों में पहुंचती है। ऐसे में चूल्हे पर खाना बनाने में भी परेशानी होती है। प्रशासन को गंगा घाट पर अंतिम संस्कार को तत्काल रुकवाते हुए गांव में लोगों की जांच करानी चाहिए। -लता देवी
बीमार लोगों की कराई जाए जांच
अंतिम संस्कार के लिए नियत स्थान होने के बाद भी उसका पालन नहीं हो रहा है। गांव में महामारी की चपेट में आकर लोगों का बुरा हाल है। स्थिति को संभालने के लिए गांव में शिविर लगाते हुए लोगों की जांच की जाए और अधिक से अधिक लोगों का वैक्सीनेशन कराया जाए। -कन्हैया गुप्ता
गंगा को गंदगी से बचाया जाए
गंगा किनारे अंतिम संस्कार करने के बाद लोग मृतक की राख को गंगा में बहा देते हैं तो कुछ लोग राख को छोड़कर चले जाते हैं। इससे गंगा की स्वच्छता पर धब्बा लगने के साथ ही गांव में भी राख उड़कर पहुंचती है। जिला प्रशासन को तत्काल प्रभाव से इसे रुकवाना चाहिए। महामारी से निजात दिलाने के लिए भी प्रयास करने चाहिए। - स्वदेश ब्रह्मचारी
कराई जा रही जांच
महामारी के दौर में क्षेत्र के लोगों की मदद करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। स्थिति को संभालने के लिए स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के साथ लगातार बैठक की जा रहीं है। क्षेत्र में घर-घर टीम भेजकर जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग को कहा गया है और लोगों की जांच कराई जा रही है। - डा. अनीता लोधी, विधायक डिबाई
जांच को लगाई गई है टीम
अधिकतर स्टाफ की ड्यूटी कोरोना मरीजों के लिए तो कुछ स्टाफ की ड्यूटी वैक्सीनेशन के लिए लगी हुई है। फिर भी अधिकारियों से वार्ता करते हुए कोशिश की जा रही है कि प्रत्येक गांव में शिविर लगाकर लोगों की जांच की जाए। जांच के लिए टीमें लगाई गई हैं। -डा. दीपक कुमार, पीएचसी कसेरकलां प्रभारी
गंगा किनारे अंतिम संस्कार किए जाने से गंगा मैली होने के साथ ही राख उड़कर गांव में पहुंच रही है। इससे लोग काफी परेशान हैं। श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किए जाने चाहिए, ताकि राख उड़ने से ग्रामीणों को राहत मिल सके। श्मशान घाट की क्षमता बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन को कदम उठाने चाहिए। -ओमवीर सिंह, ग्राम प्रधान राजघाट बांगर