गाजियाबाद। मेरठ में भारतीय स्टेट बैंक में क्लर्क कैडर के सहायक पद पर फर्जीवाड़े के मामले में विशेष न्यायालय सीबीआई के न्यायाधीश अंजनी कुमार ने न्यायिक मजिस्ट्रेट सीबीआई अदालत की ओर से सितंबर-2025 में सुनाई गई सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने पांचों दोषियों की अपील खारिज करते हुए जेल भेज दिया। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सभी दोषियों को तीन वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई थी और दोषियों पर 2.1 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया था।
25 अप्रैल 2015 को दर्ज हुआ था केस
सीबीआई ने तरुण उप्पल, संजीव कुमार, विपिन कुमार, सुरेश चंद्र सैनी एवं गुरमीत सिंह देवल के खिलाफ 25 अप्रैल 2015 को जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोप में केस दर्ज किया था। जांच में सामने आया कि भारतीय स्टेट बैंक के केंद्रीय भर्ती एवं पदोन्नति विभाग, कार्पोरेट सेंटर मुंबई की ओर से जुलाई अगस्त 2014 में विभिन्न तिथियों पर क्लेरिकल कैडर में सहायकों की भर्ती के लिए ऑनलाइन लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। जांच के अनुसार गुरमीत सिंह देवल, विपिन कुमार और सुरेश चंद्र सैनी ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में क्लेरिकल कैडर में सहायक के पद के लिए 2014 में ऑनलाइन परीक्षा दी थी। इसे एमआईईटी कैंपस वन एनएच-58 बागपत क्राॅसिंग बाईपास रोड, मेरठ पर आयोजित हुई थी। सीबीआई की जांच में सामने आया कि तरुण उप्पल ने गुरमीत सिंह देवल, विपिन कुमार और सुरेश चंद्र सैनी की परीक्षा दी थी। जांच में यह भी सामने आया कि तरुण उप्पल की मिलीभगत से संजीव कुमार ने 6.50 लाख रुपये लिए थे। बाद में यह रकम आपस में बांट ली गई।
अदालत ने सजा पर लगाई मुहर
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायिक मजिस्ट्रेट सीबीआई अदालत ने सितंबर 2025 में दोषियों को तीन वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इसके साथ ही दोषियों पर 2.1 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया था। दोषियों ने इस फैसले के खिलाफ अपील की थी। विशेष न्यायालय सीबीआई के न्यायाधीश अंजनी कुमार ने अपील पर सुनवाई के बाद निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए सभी अपील खारिज कर दीं।
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