खुर्जा। वैशाली कॉलोनी निवासी दिव्यांग वृद्ध चिमनलाल रेलवे विभाग में की गई 28 साल की नौकरी के साक्ष्य के लिए विभागों के चक्कर काट रहे थे। 11 सालों तक विभागों और जनप्रतिनिधियों से कोई मदद नहीं मिली तो सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई।
वैशाली कॉलोनी निवासी चिमनलाल ने बताया कि रेलवे विभाग के मुरादाबाद मंडल स्थित रेलवे के अस्पताल में कर्मचारी पद पर कार्य किया। उनका कहना है कि वर्ष 1977 में उन्होंने नौकरी प्राप्त की और वर्ष 2015 में सेवानिवृत्त हो गए। सेवानिवृत्त होने के बाद उनकी पेंशन व अन्य मद की राशि मिलनी बंद हो गई।
जब उन्होंने इस संबंध में विभाग में संपर्क किया तो उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी। फिर उन्होंने रेलवे के केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण में शिकायत दी। यहां पर मंडल की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया और बताया कि उनका कोई रिकॉर्ड नहीं है। उनका आरोप है कि विभाग के किसी अधिकारी ने उनके दस्तावेज गायब कर दिए। इसके लिए उनसे कुछ अधिकारियों ने रिश्वत भी मांगी।
उन्होंने इस संबंध में पुलिस, रेलवे विभाग और विधायक, सांसद व अन्य जनप्रतिनिधियों के पास गुहार लगाई लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई। 12 मई को सर्वाेच्च न्यायालय ने उनकी पीआईएल स्वीकार की। उनको अब उम्मीद है कि सही न्याय मिलेगा।