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UP: पुलवामा जैसे आतंकी हमले की तो नहीं थी साजिश? सैन्य ठिकानों की रेकी ने बढ़ाई सुरक्षा एजेंसियों की चिंता

Sat, 21 Mar 2026 10:13 AM IST
Akash Dubey समीर बिसारिया, कौशांबी (गाजियाबाद)

सार

13 मार्च को कौशांबी में देश की जासूसी का मामला सामने आया। दिल्ली से जम्मू-कश्मीर तक रेलवे स्टेशनों और सैन्य ठिकानों की रेकी हुई है। सेना की विशेष ट्रेनों की गतिविधि का पता लगाने की बात भी सामने आई है। 
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जैश-ए-मोहम्मद व लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों ने पुलवामा, उरी और मुंबई 26/11 जैसे आतंकी हमलों की तरह देश को दहलाने की तैयारी तो नहीं की थी। यह अंदेशा एक बार फिर जताया जा रहा है।

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इस तरह के हमलों से पहले भी आतंकियों ने रेकी कर दुश्मनों को भारत भेजा और साजिश को अंजाम दिया था। 13 मार्च को कौशांबी क्षेत्र में देश की जासूसी का मामला सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। दिल्ली से जम्मू-कश्मीर तक रेलवे स्टेशनों और देश के सैन्य एवं सुरक्षाबल के ठिकानों की रेकी हुई है। 

इनके अलावा सेना व उसकी विशेष ट्रेनों की मूवमेंट ट्रेस करने की बात किसी बड़ी आतंकी साजिश की तरफ इशारा कर रही है। कुछ दिन पहले ही मसूरी के नाहल में जैश-ए-मोहम्मद कनेक्शन सामने आने के बाद से शक और गहरा गया है। हालांकि अभी तक की जांच में किसी आतंकी संगठन के शामिल होने की आधिकारकि पुष्टि नहीं हुई है।

26 नवंबर 2008 को पाकिस्तान से समुद्री रास्ते मुंबई के बंदरगाह के जरिए घुसे 10 आतंकियों ने शहर में 60 घंटे से अधिक समय तक आतंक मचाया था। इस हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने ली थी। ताज होटल, ओबेरॉय, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस और नरीमन हाउस समेत कई जगहों पर हुए हमले में 166 से अधिक लोग मारे गए, जबकि 300 से अधिक घायल हुए थे।

इसके 10 वर्ष बाद 18 सितंबर 2016 को जम्मू-कश्मीर के उरी में आतंकियों ने सेना के बेस पर हमले से 19 जवान बलिदान हुए। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की जांच में पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का हाथ बताया गया। हमले के नौ दिन बाद भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक कर आतंकी लॉन्चपैड तबाह किए।

चार राज्यों के सैन्य ठिकानों की रेकी और चार देशों से जुड़े तार
जासूसी मामले में अभी तक चार राज्यों के प्रमुख सैन्य व सुरक्षाबलों के ठिकानों की जानकारी पाकिस्तान, मलेशिया, युके और दुबई के नंबरों पर भेजने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियों ने गंभीर आतंकी साजिश को अंजाम देने से पहले की तैयारी का अंदेशा जताया है। आरोपियों ने दिल्ली, मुंबई, हरियाणा और राजस्थान के कई प्रमुख सैन्य ठिकानों व सुरक्षाबलों के स्टेशनों की भी रेकी की थी।

जासूसी का मामला सामने आने के बाद देशभर में कई जगह से पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों से पूछताछ में यह बात सामने आई है। कौशांबी पुलिस और एसआईटी ने गिरफ्तार किए आरोपियों ने बताया कि दो व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए विदेशी व्यक्ति सरदार से जुड़े हुए थे। सरदार ने सबसे पहले बनाए व्हाट्सएप ग्रुप में सुहेल, महक, राज, शिवा, रितिक और प्रवीण को जोड़ा। इसके बाद चेन शुरू हुई और अन्य आरोपी ग्रुप में जुड़ते चले गए।

यह है मामला
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और गाजियाबाद पुलिस की टीम ने पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में एक नेपाली नागरिक समेत चार लोगों को कौशांबी से शुक्रवार को गिरफ्तार किया। पांच नाबालिगों को भी हिरासत में लिया गया है। आरोपी देश के सैन्य ठिकानों की रेकी कर गोपनीय सूचना पाकिस्तान में बैठे आकाओं को दे रहे थे। आरोपियों के कब्जे से नौ मोबाइल फोन और 10 सिमकार्ड बरामद हुए हैं। विशेष टीम (एसआईटी) में खुफिया ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी भी शामिल थे।

गिरफ्तार आरोपियों में नेपाल के लुम्बिनी निवासी गणेश, मेरठ निवासी गगन कुमार, बिहार का विवेक, जौनपुर निवासी दुर्गेश शामिल है। पकड़े गए पांचों नाबालिग मेरठ व गाजियाबाद के ही हैं। अधिकारियों ने बताया, पाकिस्तान इंटेलीजेंस ऑपरेटर (पीआईओ) सरफराज ढोगर उर्फ सरदार उर्फ जोरा सिंह पकड़े गए नाबालिगों से सीधे संपर्क में था। पूछताछ में सभी ने सरदार के व्हाट्सएप ग्रुप का हिस्सा होने और उसे फोटो-वीडियो व लोकेशन भेजने की बात स्वीकार की है। उन्होंने यह भी बताया कि सरदार के कहने पर उन्होंने कई जगह कैमरे भी लगाए।
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पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि गिरोह के सरगना सुहेल मलिक, नौशाद अली व समीर उर्फ शूटर हैं। वह सैन्य ठिकानों, प्रमुख प्रतिष्ठान, रेलवे स्टेशन की रेकी कर फोटो-वीडियो व जीपीएस लोकेशन विदेशी नंबरों पर भेज रहे थे।
  
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