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Ghaziabad News: ‘नमामि गंगे योजना’ में करोड़ों खर्च के बाद सिर्फ छिजारसी में निर्मल हुई हिंडन

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साहिबाबाद। केंद्र सरकार की नदियों को स्वच्छ बनाने के लिए नमामि गंगे योजना में करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद हिंडन नदी का पानी सिर्फ एक जगह छिजारसी प्वाइंट पर निर्मल हुआ है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट से इसका पता चला है। सहारनपुर में शाकुंभरी देवी की पहाड़ियों से निकलने वाली हिंडन नदी का दायरा करीब करीब 400 किलोमीटर एरिया में फैला है, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड समय-समय पर सात जगहों से नमूने लेकर जांचता है। नमामि गंगे योजना के तहत करीब 400 करोड़ रुपये हिंडन नदी को निर्मल बनाने के लिए खर्च करने का अनुमान है।
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कोरोना काल में हिंडन नदी का पानी प्रदूषण से मुक्त होकर जलीय जीव-जंतु के लिए लायक हुआ था लेकिन दो साल बाद हालत सिर्फ बिगड़ने लगे। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार छिजारसी प्वाइंट को छोड़कर नदी में बाकी जगह का पानी सिंचाई, जलीय जीव-जंतु या फिर पक्षियों के लिए उपयुक्त नहीं है। यही कारण है कि हिंडन नदी में हर साल विदेशी पक्षियों ने आना कम कर दिया है।
समाजसेवी सुशील राघव का कहना है कि हिंडन नदी के प्रदूषित होने का मुख्य कारण औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला अपशिष्ट है। हालांकि, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी हर साल हिंडन को निर्मल बनाने के लिए परियोजनाएं तो बनाते हैं लेकिन उसका लाभ बेहद कम ही मिलता है। रिपोर्ट में बताया गया कि सहारनपुर से गौतमबुद्धनगर तक प्रदेश के कई जनपदों से हिंडन नदी बहती है। इस दूरी में नदी के पानी में घुलनशील ऑक्सीजन, जैविक रसायन ऑक्सीजन यानी बीओडी का स्तर काफी खतरनाक है।
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ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जब भी जांच के लिए नमूने एकत्रित करता है तो उसकी रिपोर्ट अधिकांश बार खराब रहती है। बोर्ड ने फरवरी में पानी के नमूने लेकर उसकी रिपोर्ट जारी की जिसमें सहारनपुर से नोएडा तक महज एक जगह यानी छिजारसी पर पानी साफ हुआ है। इस जगह का पानी सिंचाई और जीव-जंतुओं के प्रयोग किया जा सकता है। इसके अलावा अन्य जगहों पर हिंडन नदी के पानी की स्थिति काफी खराब यानी ई-श्रेणी में दर्ज हुई है।
प्रदूषण बोर्ड जांच के लिए सात जगहों से पानी के नमूने लेता है। उसमें सहारनपुर का महेशपुर, मेरठ में सरधना बागपत रोड, गाजियाबाद में करहेड़ा, जीटी रोड हिंडन पुल के पास और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर छिजारसी पुल के पास का प्वाइंट शामिल है। इसके अलावा नोएडा कुलेसरा से हिंडन के पानी का नमूना लिया जाता है।

हिंडन नदी का प्रतिवर्ष औसत हाल करहेडा प्वाइंट, गाजियाबाद प्वाइंट
वर्ष डीओ बीओडी टोटल कोलोफोर्म
2022 0.71 20.9 2.85 लाख
2021 01.5 18.9 2.34 लाख
2020 01.6 17.2 6.20 लाख
2019 02.25 21.3 1.84 लाख
2018 01.66 31.9 28.36 हजार

ये हैं हिंडन नदी का मानक
डीओ -घुली हुई आक्सीजन -5 मिलीग्राम/लीटर
बीओडी- जैव रसायन आक्सीजन मांग -3 मिलीग्राम/लीटर
टोटल कोलोफोर्म - 5000/लीटर

हिंडन के पानी का हाल (फरवरी 2023 की जांच के आधार पर रिपोर्ट )
स्थान डीओ बीओडी टोटल कोलोफोर्म
सहारनपुर,महेशपुर - 44 36 हजार
बागपत रोड, मेरठ 3.8 24 1.30 लाख


छिजारसी पुल, गाजियाबाद 4.66 12 3.30 लाख



कुलेसरा, नोएडा 0.1 20 3.40 लाख


ये कहते हैं अधिकारी नदी के पानी को साफ व निर्मल बनाने के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ लगातार वार्ता हो रही है। फरवरी माह में नमूने लेकर जांच हुई। उसकी रिपोर्ट में छिजारसी के पास से पानी साफ हुआ है। करीब 400 किलोमीटर एरिये की नदी में पड़ने वाले जनपदों के अधिकारियों को सीपीसीबी से निर्देश दिए जा चुके हैं। अगली जांच रिपोर्ट और बेहतर करने का प्रयास रहेगा।
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- उत्सव शर्मा, क्षेत्रीय प्रबंधक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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