माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। हवा के गुणवत्ता का स्तर (एक्यूआई) दो सौ के पार होने पर घर से मास्क लगाकर ही निकलें। स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक्यूआई 200 पहुंचने पर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और दिल व सांस के रोगियों को घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी गई है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.अखिलेश मोहन ने बताया कि वायु प्रदूषण केवल फेफड़ों को ही नहीं बल्कि पूरे शरीर और अंग को प्रभावित करता है। सांस के साथ फेफड़ों में पहुंचने वाले हानिकारक तत्व खून में मिलकर दिल, गुर्दे, लिवर, आंत समेत सभी अंगों को प्रभावित करते हैं। ऐसे में गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और दिल व सांस के रोगियों के साथ कोमोरबिड स्थिति वाले मरीजों को भी गहन सावधानी बरतनी चाहिए। बढ़ते प्रदूषण और वायुमंडल के निचले स्तर को ढकने वाली जहरीली धुंध के बारे में जागरूक रहना जरूरी है। विषाक्त धुंध कार्बन मोनोऑक्साइड, पार्टिकुलेट मैटर, जमीन के स्तर की ओजोन और नाइट्रोजन और सल्फर डाईऑक्साइड के ऑक्साइड का मिश्रण है। वायु प्रदूषण में व्याप्त पार्टिकुलेट मैटर सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए सबसे अधिक खतरनाक है। इसके कारण कंजक्टिवाइटिस, सिरदर्द के साथ सांस लेने में दिक्कत, अनिद्रा, बेचैनी, मतली, उल्टी और पेट में दर्द की की समस्या हो सकती है। इस मौसम में यदि किसी को सांस फूलने, देर तक खांसी होने, दिल की धड़कन या रक्तचाप बढ़ने की शिकायत हो तो तुरंत चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।
यह जारी की गई एडवाइजरी
- - घर से बाहर निकलने पर मास्क जरूर लगाएं।
- सुबह और शाम को घर के दरवाजे, खिड़की खोलने से बचें।
-बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं स्मॉग के दौरान घर से बाहर न निकलें।
-किसी बीमारी के पुराने मरीज अतिरिक्त सावधानी बरतें।
-घर में खाना पकाने के दौरान वेंटिलेशन का ध्यान रखें।
- ज्यादा ट्रैफिक वाले स्थानों पर जाने बचें।
-घर या आसपास धुआं करने वाली सामग्री जलाने से बचें।
-सिगरेट और तंबाकू के उत्पादों से बचें, ये प्रदूषण की गंभीरता बढ़ाते हैं।
यह हो सकती है परेशानी
सांस फूलना, आंखों में जलन, आंखों का लाल होना, आंखों से पानी आना, चक्कर आना, सीने में दर्द या बेचैनी, खांसी, नाक में जलन होना। अगर यह लक्षण दिखाई दे तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।