साहिबाबाद। अंतिम नोटिस के बावजूद 30 से अधिक फैक्टरियों में एयर पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइस (एपीसीडी) नहीं लगाए हैं। अब क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इन सब फैक्टरियों को सूचीबद्ध करके यूपीपीसीबी को रिपोर्ट भेजेगा। उसके बाद ही तालाबंदी की कार्रवाई शुरू की जाएगी। हवा में जहर घोलने वाली यह 30 से अधिक फैक्टरियां गाजियाबाद और हापुड़ के अलग-अलग औद्योगिक क्षेत्रों में है। प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने फरवरी 2026 को निर्देश जारी किया था। इसमें कहा कि औद्योगिक इकाइयों के लिए चिमनी से निकलने वाले धुएं में पीएम की सीमा 80 मिलीग्राम प्रति सामान्य घन मीटर से घटाकर 50 मिलीग्राम की जाएगी। 30 सितंबर तक सभी इकाइयों को इस निर्देश का पालन करते हुए चिमनियों में फिल्टर लगाने थे। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गाजियाबाद में इसके दायरे में आने वाली करीब 260 इकाइयां चिन्हित की थीं। मार्च में इन्हें पहला नोटिस किया गया, इसके बाद 140 इकाइयों ने बोर्ड को बताया कि उन्होंने पीएम की मात्रा 50 तक लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बाकी 120 ने कोई रुचि नहीं दिखाई। इन सभी को अगस्त में दोबारा नोटिस भेजा गया था। एक अक्तूबर से नियम बदल चुके हैं, लेकिन अब तक 30 से अधिक फैक्टरियां हैं जहां एपीसीडी नहीं लगाई गई है। अब इन फैक्टरियों की रिपोर्ट यूपीपीसीबी को भेजी जाएगी।
अक्तूबर के पहले सप्ताह से निरीक्षण कर रही टीम
पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी अंकित सिंह ने बताया कि हमारी टीम रिपोर्ट तैयार कर रही है, जिन फैक्टरियों में डिवाइस नहीं लगाए गए हैं, ऐसे सभी फैक्टरियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अक्तूबर के पहले सप्ताह से प्रदूषण नियंत्रण विभाग के साथ ही जिला प्रशासन की टीम औद्योगिक क्षेत्रों का औचक निरीक्षण कर ऐसी फैक्टरियों को सूचीबद्ध कर रही है। रिपोर्ट भेजकर उनको बंद करने की कार्रवाई की जाएगी।
आवासीय इलाके में चल रही कई फैक्टरियां
जिन फैक्टरियों ने एपीसीडी नहीं लगाई है,उनकें से कई आवासीय इलाके में संचालित हैं। छोटे-छोटे प्लॉट व दो कमरानुमा मकान में यह फैक्टरियां चल रही हैं। इनमें से अधिकतर में मेटल इंडस्ट्री और डाइंग फैक्टरियां शामिल है। यह फैक्टरियां लोनी, हापुड़ एमडी रोड, बुलंदशहर औद्योगिक क्षेत्र, हिंडन विहार व अन्य कई इलाकों में संचालित हैं।