वादी मुकदमा जबर सिंह ने दो जनवदी 2012 को कोतवाली देहात में तहरीर देकर बताया था कि उनके पिता रामपाल सिंह दोपहर करीब एक बजे खेत पर ही मौजूद थे। वादी भी वहां से कुछ दूरी पर ही दूसरे खेत पर था। तभी पीड़ित ने फायर की आवाज सुनी। जब वह मौके पर पहुंचा तो उनके पिता रामपाल सिंह लहुलुहान अवस्था में खेत में अचेत पड़े हुए थे। उनके माथे और हाथ से काफी खून बह रहा था।
जबकि, दो आरोपी हाथ में हथियार लहराते हुए दूसरे खेत की ओर से भाग रहे थे। अस्पताल पहुंचाने पर चिकित्सकों ने उनके पिता को मृत घोषित कर दिया था। पुलिस ने मामले में तहरीर के आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।
इस दौरान गांव निवासी आरोपी मनोज, प्रभात व मांगेराम का नाम प्रकाश में आया था। पुलिस ने जांच पूरी कर तीनों अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट तैयार कर न्यायालय में दाखिल कर दी थी। बीते दिनों मामले के विचारण के दौरान ही अभियुक्त मांगेराम की मौत हो गई थी। जबकि, गत मंगलवार को दोनों पक्षों के गवाहों के बयानों और साक्ष्यों का अवलोकन कर न्यायालय ने अभियुक्त मनोज और प्रभात को दोषी करार दिया था।
लेकिन, अभियुक्त प्रभात उससे पूर्व ही फरार हो गया था। न्यायलय ने बुधवार को सजा सुनाने की तारीख नियत की थी। लेकिन, प्रभात बुधवार को अदालत में प्रस्तुत नहीं हुआ। जबकि, मनोज को कोर्ट में पेश किया गया। इसी के चलते न्यायालय ने अभियुक्त मनोज को ही अभी आजीवन कारावास और पांच हजार रुपये का अर्थदंड सुनाया है। जबकि, प्रभात की गिरफ्तारी के निर्देश दिए हैं।