फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ghaziabad News: डेढ़ दशक से फर्जी डिग्री से वकालत करने का आरोप, अब प्रैक्टिस पर लटकी तलवार

विज्ञापन
विज्ञापन
गाजियाबाद। फर्जी शैक्षिक अभिलेखों के आधार पर डेढ़ दश से अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराने के आरोप में तीन लोगों के खिलाफ प्रयागराज के सिविल लाइंस थाने में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जिले की तीन अधिवक्ताओं की प्रैक्टिस पर तलवार लटक गई है। जिला बार एसोसिएशन ने जल्द ही बैठक कर फर्जी दस्तावेज के आधार पर वकालत करने के मामले में गंभीर निर्णय लेने की बात कही है। तीनों मामलों में बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के सचिव आरके शुक्ला ने दर्ज कराई है। आरोप है कि दो अधिवक्ता 15 साल से तो तीसरा करीब चार साल से फर्जी दस्तावेज के आधार पर वकालत कर रहे थे और अब यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।
विज्ञापन


पहली प्राथमिकी आठ अगस्त को दर्ज हुई। इसमें जिले के अधिवक्ता अभय सक्सेना ने वर्ष 2010 में पंजीकरण कराया था। उन्होंने इसके लिए विधि स्नातक की डिग्री और अंकपत्र बार काउंसिल में पंजीकरण के लिए आवेदन के साथ संलग्न किए थे। दस्तावेज सत्यापन के लिए रुहेलखंड विश्वविद्यालय भेजे जाने पर यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट में अंकपत्र की छायाप्रति को गलत और असत्य बताया गया। रिपोर्ट में हस्ताक्षर भी अंकित नहीं होने की बात सामने आई। इसके बाद संबंधित अधिवक्ता को बार काउंसिल की ओर से नोटिस भेजा गया था।
दूसरी प्राथमिकी नौ अगस्त को दर्ज हुई। अधिवक्ता शिखर सक्सेना ने वर्ष 2010 में पंजीकरण कराया था। इन्होंने विधि स्नातक डिग्री और अंकपत्र को बार काउंसिल के आवेदन के साथ लगाए जाने का उल्लेख है। आरोप है कि सत्यापन के लिए रुहेलखंड विश्वविद्यालय भेजे गए दस्तावेज की जांच में अंकपत्र की प्रति गलत और असत्य पाई गई। विश्वविद्यालय की रिपोर्ट मिलने के बाद संबंधित अधिवक्ता को नोटिस भेजा गया और हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की गई।
विज्ञापन

तीसरी प्राथमिकी 11 अगस्त को दर्ज हुई। अधिवक्ता औरंगजेब के वर्ष 2022 में पंजीकरण करने के लिए विधि स्नातक की डिग्री और अंकपत्र बार काउंसिल के आवेदन के साथ लगाए थे। सत्यापन के लिए दस्तावेज राजस्थान के जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ उदयपुर भेजे गए। वहां से आई रिपोर्ट में अंकपत्र की छायाप्रति को गलत और असत्य बताया गया। इसके बाद संबंधित को नोटिस भेजा गया और हाईकोर्ट के आदेश के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया।
वहीं, बार एसोसिएशन के सचिव वरुण त्यागी का कहना है कि इस मामले में जल्द ही एसोसिएशन की बैठक की जाएगी और बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के दिशा निर्देशों का पालन करते हुए आरोपी अधिवक्ताओं की वकालत करने पर रोक लगाई जा सकती है।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें