गाजियाबाद। प्रशासनिक मशीनरी की कार्यशैली के जिले में दो रूप देखने को मिल रहे हैं। एक कर्मचारी पिछले चार महीने से अपने तैनाती स्थल से अनुपस्थित हैं, लेकिन वेतन समय से ले रहा है। वहीं, दूसरी तरफ एक दिव्यांग कर्मचारी जो लगातार अधिकारियों से गुहार लगा रहा है लेकिन तीन महीने से उसे वेतन नहीं मिल पा रहा है। खास बात यह है कि दोनों मामलों में शिकायत और गुहार लगाए जाने के बाद अफसर कार्रवाई करने के बजाय जांच का आश्वासन दे रहे हैं।
जलालाबाद से गांव मथुरापुर में सफाई कर्मचारी अजय वर्मा की तैनाती 12 सितंबर को हुई थी। लगभग 10-12 दिनों तक कार्यभार ग्रहण ना करने पर सहायक विकास अधिकारी ने पंचायती राज अधिकारी को पत्र लिखकर इसकी सूचना दी। उसके बाद अक्तूबर माह में जब सफाई कर्मी गांव में नहीं पहुंचा तो खंड विकास अधिकारी ने डीपीआरओ और सीडीओ को पत्र के जरिए जानकारी दी। सीडीओ अभिनव गोपाल ने डीपीआरओ को कार्रवाई करने के आदेश दिए लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। नवंबर में खंड विकास अधिकारी और ग्राम प्रधान ने दोबारा से पत्र लिखा लेकिन अभी तक तैनाती स्थल पर यह कर्मचारी तैनात नहीं हुए हैं। इस मामले में जब अजय वर्मा से बात की गई तो उन्होंने कोई भी जवाब देने से इन्कार कर दिया।
दिवाली पर भी नहीं मिली तख्वाह
दिव्यांग कर्मचारी विजयपाल की चुनाव कार्य के लिए वेयर हाउस में तैनाती की गई है। उसको पिछले तीन महीने से वेतन नहीं मिला है। कर्मचारी ने दिवाली के त्योहार का हवाला देते हुए अधिकारियों के सामने वेतन दिलवाने की गुहार भी लगाई लेकिन अभी तक वेतन नहीं मिला। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष देवव्रत चौधरी ने बताया कि इस कर्मचारी ने जिलाधिकारी सहित सीडीओ सभी को वेतन दिलवाने के लिए पत्र भी लिखा है। वेतन दिलवाने का आश्वासन भी दिया गया लेकिन कर्मचारी को अभी तक वेतन नहीं मिला है।
एक-एक व्यक्ति की जानकारी रखना मुश्किल है। मामले की पूरी जानकारी नहीं है। अधिकारी ने कार्रवाई का आदेश दिया है तो जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। - कुंवर सिंह, डीपीआरओ