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मोबाइल से साल भर बाद खुला मौत का राज

Mon, 03 Oct 2016 12:11 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
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मृतक सुनील - फोटो : अमर उजाला
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पुलिस जिस सीनियर मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव की मौत को ट्रेन से गिरकर हुआ हादसा मान चुकी थी, वह लूट के दौरान हत्या का मामला निकला। एक साल बाद एग्जीक्यूटिव की मौत का राज उनके मोबाइल से खुला। जीआरपी ने मोबाइल की कॉल डिटेल निकाली और कड़ियों को जोड़ते हुए अपराधी तक पहुंच गई। जीआरपी ने लुटेरे को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
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मूलरूप से भोड़पुर ग्वालियर निवासी सुनील दोहलिया (27) दिल्ली में निजी क्षेत्र की फाइनेंस कंपनी में सीनियर मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव थे। 8 अक्तूबर 2015 को वह आनलाइन शॉपिंग कंपनी में इंटरव्यू देकर कर्नाटक  एक्सप्रेस से ग्वालियर जा रहे थे। उस दिन रूट डायवर्जन की वजह से ट्रेन पलवल की बजाय गाजियाबाद होकर गुजर रही थी।

अगले दिन सुनील का शव हिंडन नदी के पास रेलवे ट्रैक  के पास पड़ा मिला था। लिंक रोड पुलिस ने हादसे में ट्रेन से गिरकर मौत मानते हुए शव का पंचनामा भर दिया और पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव ले गए।
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सीओ जीआरपी रणधीर सिंह ने बताया कि मृतक के बड़े भाई नितिन दोहलिया ने न्यायालय के माध्यम से 11 सितंबर 2016 को सुनील दोहलिया की हत्या की आशंका जताते हुए जीआरपी में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

जीआरपी प्रभारी सोमवीर सिंह के नेतृत्व में टीम बनाकर इस मामले की पड़ताल में लगाई तो कॉल डिटेल के आधार पर उस व्यक्ति तक पहुंच गई, जो सुनील का मोबाइल इस्तेमाल कर रहा था। युवक ने बताया कि उसने वह मोबाइल कड़कड़ मॉडल निवासी मनीष से खरीदा था।

मनीष से पूछताछ की तो उसने कुबूल कर लिया कि 8 अक्तूबर 2015 की रात उसने यह मोबाइल कर्नाटक एक्सप्रेस के जनरल कोच से लूटा था। लूट का विरोध करने पर सुनील को ट्रेन से धक्का दे दिया था। सीओ रणधीर सिंह ने बताया कि लूट और हत्या के आरोपी मनीष को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। उसके पास से लूटा गया मोबाइल भी बरामद कर लिया गया है।

एक साल तक रिपोर्ट दर्ज न होने की जांच के आदेश
मृतक सुनील दोहलिया के भाई नितिन ने बताया कि भाई की मौत के कुछ दिन बाद तक उनका मोबाइल चलता रहा। नवंबर 2015 में बिल की रिकवरी के लिए फोन कंपनी से लोग उनके घर पहुंचे तो उन्हें शक हुआ। सुनील की मौत को उनका दिल हादसा मानने को तैयार नहीं था।

इसके बाद उन्होंने संबंधित थाने में हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन नहीं की गई। इसके बाद एसएसपी गाजियाबाद, जीआरपी एसपी मुरादाबाद के पास पहुंचे, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। थक कर उन्होंने न्यायालय के माध्यम से रिपोर्ट दर्ज कराई। वहीं सीओ जीआरपी ने बताया कि डीआईजी दलवीर सिंह ने एक साल तक रिपोर्ट दर्ज न होने की जांच के आदेश दिए हैं।
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