गाजियाबाद। फसल अवशेष जलाने से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए जनपद स्तर पर कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि पराली जलाने की घटनाओं को पूरी तरह रोकने के लिए बहुस्तरीय निगरानी तंत्र सक्रिय किया जाए और उल्लंघन करने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
डीएम ने बताया कि जनपद, तहसील, विकासखंड और ग्राम पंचायत स्तर पर निगरानी सेल का गठन किया गया है। दो एकड़ से कम क्षेत्र में पराली जलाने पर 5 हजार रुपये, 5 एकड़ तक 10 हजार रुपये और इससे अधिक क्षेत्र पर 30 हजार रुपये तक पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूली जाएगी। दोबारा उल्लंघन होने पर अतिरिक्त कार्रवाई भी की जाएगी।
उन्होंने बताया कि कृषकों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए विभिन्न कृषि यंत्रों पर अनुदान दिया जा रहा है। व्यक्तिगत किसानों को 50 प्रतिशत तथा एफपीओ और ग्रामीण उद्यमियों को कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने के लिए 80 प्रतिशत तक अनुदान है। गेहूं कटाई के दौरान कंबाइन हार्वेस्टर में सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम लगाना अनिवार्य किया गया है। किसानों को पराली गोशालाओं में चारे और बिछावन के रूप में उपयोग करने और कम्पोस्ट खाद बनाने के लिए प्रेरित किया जाए।