दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे को रफ्तार देने में जुटा प्रशासन
गाजियाबाद। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे (़डीएमई) से जुड़ी बाधाओं को दूर कर निर्माण को गति देने में जुटे प्रशासन ने अब चौथे चरण (डासना-मेरठ) को लेकर नया प्लान बनाया है। चार गांवों में जमीन अधिग्रहण को लेकर चले रहे विवाद के बीच प्रशासन ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के अधिकारियों से कहा कि वे ईस्टर्न पेरिफेरल से जोड़कर मेरठ तक एक्सप्रेस-वे की छह लाइन सड़क तैयार कर लें। उसके बाद आगे की सड़क का निर्माण विवाद सुलझने के बाद तैयार की जाए। डीएमई को सीधे जोड़े जाने पर मेरठ से आने व जाने वाले वाहनों को ईस्टर्न पेरिफेरल के डासना स्थित टोल प्लाजा से होकर गुजरना पड़ेगा।
एक्सप्रेस-वे के चौथे चरण को लेकर गाजियाबाद जिले में 18 गांवों की 349.72 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण हेतु चिन्हित की गई थी। इसमें नाहल, रसूलपुर सिकरोड, कुशलिया और डासना देहात में जमीन अधिग्रहण पूरा नहीं हो सका है। शेष गांवों में जमीन अधिग्रहण के बाद निर्माण जारी है। चार गांवों के मामले में असल दिक्कत मुआवजे की कीमतों को लेकर है, जिसे लेकर पूरा मामला शासन स्तर पर बीते आठ माह से लंबित है। प्रोजेक्ट में देरी के पीछे एनएचएआई जमीन अधिग्रहण को बड़ा कारण बताती आ रहा है। अब प्रशासन का कहना है कि ईस्टर्न पेरिफेरल से मेरठ की तरफ एक्सप्रेस-वे के काम में कहीं कोई दिक्कत नहीं है। बशर्ते एनएचएआई तेजी से काम शुरू कराए तो मेरठ जाने-आने वाले लोगों को जल्द एक्सप्रेस-वे पर दौड़ने की सौगात मिल सकेगी। प्रशासन के प्रस्ताव पर एनएचएआई ने भी सहमति दी है, जिसके बाद डीएमई के चौथे चरण का काम ईस्टर्न तक पूरा करने की अंतिम समय सीमा सितंबर तक तय की गई है। हालांकि अथॉरिटी के अधिकारियों का कहना है कि सितंबर तक काम पूरा हो पाना मुश्किल हैं, लेकिन दिसंबर तक वाहन दौड़ सकेंगे।
विवाद सुलझने पर नहीं जाने पड़ेगा ईस्टर्न पेरिफेरल
मौजूदा लेआउट के हिसाब से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे को ईस्टर्न पेरिफेरल के ऊपर से निकाला जाएगा। मेरठ से आने वाले वाहन सीधे ईस्टर्न के ऊपर से निकलते हुए डासना स्थित आईएमएस कॉलेज के सामने आकर उतर सकेंगे। जहां से दिल्ली जाने के लिए उन्हें 14 लेन की सड़क मिलेगी। इसी बीच ईस्टर्न पेरिफेरल पर उतरने के लिए लूप की भी सुविधा दी जाएगी। ईस्टर्न पेरिफेरल और आईएमएस कॉलेज के बीच करीब नौ किमी का हिस्सा है, जिसमें सिर्फ सरकारी जमीन पर एक्सप्रेस-वे से जुड़े फ्लाईओवर व लूट के फाउंडेशन खड़े करने का काम चल रहा है।
घोटाले के बाद मुआवजे की कीमतों पर विवाद
एक्सप्रेस-वे से जुड़े जमीन अधिग्रहण में तत्कालीन मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने जांच के बाद करोड़ों रुपये का घोटाला पकड़ा था। जांच में सामने आया था कि अधिकारियों ने दलालों के साथ मिलकर सर्किल रेट से आठ से 10 गुना तक मुआवजा दिया था, जो नियमों के तहत चार गुना तक ही दिया जा सकता था। मामले में पूर्व एडीएम घनश्याम सिंह, उनके बेटे समेत 10 से अधिक लोगों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। साथ ही मंडलायुक्त ने एनएचएआई अधिकारियों को भूमिका संदिग्ध मानते हुए सीबीआई या किसी विशिष्ट एजेंसी से जांच करने की सिफारिश की थी। उधर, मामले सामने आने पर प्रशासन ने मुआवजा देने पर रोक लगा दी थी। कुछ समय के बाद प्रशासन ने एनएचएआई का पत्र लिखकर पूछा कि क्या किसानों को उसी रेट पर मुआवजा दे दिया जाए, जिस पर पहले वितरित किया जा चुका है। एनएचएआई की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया। उल्टे शासन को पत्र लिखकर जल्द जमीन पर कब्जा दिलाने की मांग कर डाली। शासन ने प्रशासन ने जवाब मांगा तो उसने पूरे मामले पर अपना पक्ष रखा, जिसके बाद पूरा मामला शासन में लंबित है।