डीएमआरसी चीफ इंजीनियर की गलती से गिरा हैवी गर्डर
गाजियाबाद। मोहननगर मेट्रो स्टेशन के पास गिरे गर्डर के मामले में जीडीए ने अपनी जांच रिपोर्ट में डीएमआसी को दोषी ठहराया है। जीडीए की जांच रिपोर्ट में हादसा डीएमआरसी के मुख्य अभियंता, डिप्टी मुख्य अभियंता और जूनियर इंजीनियर की लापरवाही से गिरने की बात सामने आई है। प्राधिकरण की ओर से अपनी जांच रिपोर्ट प्रमुख सचिव आवास और डीएमआरसी प्रबंधक को भेजी है। साथ ही मामले की फिर से जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।
मोहननगर मेट्रो स्टेशन में गार्डन गिरने और आठ लोगों के घायल होने के मामले को गंभीरता से लेते हुए जीडीए की ओर से अपने स्तर से भी पूरी जांच कराई गई। जांच करने वाले प्राधिकरण एक्जीक्यूटिव इंजीनियर हीरालाल सिंह और असिस्टेंट इंजीनियर तकनीक भगत सिंह ने अपनी रिपोर्ट जीडीए उपाध्यक्ष रितु माहेश्वरी को सौंप दी है। जांच रिपोर्ट में डीएमआरसी के इंजीनियरों को पूरी तरह से दोषी माना गया है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि गर्डर को बगैर नट बोल्ट लगाए दो भागों में रखा गया था।
नट बोल्ट पर्याप्त नहीं लगे होने के कारण वह बीच से अलग होकर गिर गया। जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। मौके पर जांच को आए डीएमआरसी के अधिकारियों का रवैया भी सहयोगात्मक नहीं रहा। जांच रिपोर्ट में सीधे तौर पर डीएमआरसी के मुख्य अभियंता, डिप्टी मुख्य अभियंता और सहायक अभियंता को अपनी जिम्मेदारी के निर्वाहन सही प्रकार से नहीं करने के साथ लापरवाही का दोषी पाया गया है। इसी मामले में जीडीए वीसी रितु माहेश्वरी ने डीएमआरसी प्रबंधन व प्रमुख सचिव आवास को पत्र लिखकर फिर से जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई है। बता दें कि सोमवार को दिलशाद गार्डन से नया बस अड्डा मेट्रो प्रोजेक्ट में मोहननगर मेट्रो स्टेशन पर एक गार्डर गिरने से आठ लोग घायल हो गए थे। मामले में मुआवजे के साथ डीएमआरसी ने प्रोजेक्ट इंचार्ज को हटाने केसाथ एक एई व जेई को निलंबित कर दिया था।
नट बोल्टों को सही से नहीं कसा गया
जीडीए की जांच रिपोर्ट में हैवी गर्डरों को पूरा नट बोल्टों से नहीं कसने व लोड अधिक होने के चलते बाकी के प्रेशर नहीं झेल पाने के चलते गर्डर गिरने की बात सामने आई है। रिपोर्ट में साफ है कि मेट्रो अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाई होती तो यह हादसा नहीं होता।