कैग ने खंगालनी शुरू की जीडीए की फाइलें
गाजियाबाद। नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग) ने सोमवार को फिर से गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) के विभिन्न प्रोजेक्टों का ऑडिट शुरू कर दिया है। जीडीए दफ्तर में सुबह 10 बजे पहुंची चार सदस्यीय टीम ने फाइलें खंगालनी शुरू कर दी हैं। सूत्रों के अनुसार, 2012 से लेकर 2017 तक के जीडीए के विभिन्न प्रोजेक्टों की फाइलों को खंगाला जाएगा। इस बार कैग की टीम ने वित्त अनुभाग से अन्य अनुभागों की फाइलें भी मंगवाई हैं। टीम सात दिनों तक यहीं रुकेगी। वहीं, कैग के ऑडिट को लेकर जीडीए में गहमागहमी दिखी।
बता दें कि इस माह की शुरुआत में लखनऊ में प्रमुख सचिव आवास मुकुल सिंघल की अध्यक्षता में कैग और जीडीए अधिकारियों की बैठक हुई थी, जिसमें कैग ने जीडीए का फिर से प्रदर्शन लेखा परीक्षण (परफॉरमेंस ऑडिट) करने की बात कही थी। सोमवार सुबह कैग के वरिष्ठ ऑडिट अधिकारी राजेंद्र त्रिपाठी के साथ चार सदस्यीय टीम यहां पहुंची। टीम ने सबसे पहले वित्त नियंत्रक सूबेदार सिंह से मुलाकात की। इसके बाद टीम के सदस्यों को जीडीए की ओर से तीसरे तल पर कार्यालय मुहैया कराया गया। जीडीए अधिकारियों से विभिन्न अनुभागों की फाइलें मांगी हैं।
ऑनलाइन भूखंड आवंटन का मामला केंद्र में
सूत्रों के मुताबिक इस बार कैग टीम का ऑनलाइन भूखंड आवंटन की जांच पर फोकस रह सकता है। पिछली बार टीम ने इस मामले की जांच नहीं की थी। कैग को ऑनलाइन आवंटन में गड़बड़ियों की शिकायत मिलने के कारण इस बार आवंटन में लाभार्थियों के नाम और रजिस्ट्री आदि के बारे में पड़ताल की जाएगी। कैग के अधिकारियों ने बीते पांच साल के आवंटन की सूची मांगी है।
हज हाउस व कर्मचारियों की नियुक्ति जांच के घेरे में
हज हाउस निर्माण के साथ ही 206 कर्मचारियाें की नियुक्ति का मामला भी जांच के घेरे में है। हज हाउस में पहले एक मंजिला इमारत की मंजूरी मिली थी। फिर तीन मंजिला इमारत बनाए जाने के साथ जीडीए ने कंपाउंडिंग करा दी थी, लेकिन नक्शा केवल एक बार पास होने से यह मामला फंसा हुआ है। दूसरी ओर जीडीए में अर्से से काम करने वाले 206 कर्मचारियों की नियुक्ति पर कैग टीम सवाल उठा चुकी है। शासन की अनुमति के बगैर हुई नियुक्ति भी सवालों के घेरे में हैं।
अधिक फाइलों की मांग करेगी कैग टीम
कैग टीम की ओर से इस बार वित्त अनुभाग से जुड़ी ज्यादा फाइलों की मांग की जा सकती है। पिछले दफा आई कैग टीम ने विभिन्न प्रोजेक्टों की केवल 15 फीसदी फाइलों का ऑडिट किया था। इस बार जांच का दायरा बढ़ सकता है।