शहर में आठ वेंडिंग जोन बनाने का रास्ता साफ
गाजियाबाद। खाने-पीने के शौकीन शहर वासियों के लिए खुशखबरी है। नगर निगम और जीडीए जल्द ही शहर में आठ वेंडिंग जोन बनाने जा रहे हैं। विभिन्न प्रकार के लजीज व्यंजन, सब्जी व फल एक ही क्षेत्र में मिल सकेंगे। उधर, वेंडिंग जोन बन जाने पर शहर के कई हिस्सों में जाम की समस्या से निजात मिलेगी।
शासन की महत्वाकांक्षी योजना के तहत प्रत्येक जनपद में वेंडिंग जोन बनाए जाने हैं। जिले में लंबे समय से जमीन न मिल पाने के कारण योजना परवान नहीं चढ़ पा रही थी। अब प्रशासन की कोशिशों पर जीडीए व नगर निगम ने आठ वेंडिंग जोन बनाने पर सहमति दे दी है। सात जोन की जगह भी चिह्नित की जा चुकी है। शेष एक की जमीन जल्द ही फाइनल की जाएगी।
डूडा के परियोजना निदेशक पवन शर्मा ने बताया कि शहर के बाजारों में सड़कों के किनारे वेंडर्स ठेली पर खाने पीने का सामान, सब्जी व फल आदि बेचते हैं। ऐसी स्थिति में सड़कों पर जाम रहता है। वेंडिंग जोन बन जाने के बाद एक निश्चित क्षेत्र में ही फल, सब्जी व खाने-पीने का सामान बेचा जा सकेगा। इससे शहर के लोगों एक ही जगह सारा सामान मिल जाएगा। जाम से भी निजात मिलेगी। वहीं शहर को साफ-सुथरा रखने में भी मदद मिलेगी।
शहर में 23,262 वेंडर
डूडा ने वेंडर्स को चिह्नित करने के लिए सर्वे किया है। इसके मुताबिक शहर में 23,262 वेंडर हैं, जिनमें से सात वेंडिंग जोन में 2500 वेंडर्स को स्थापित कराया जाएगा।
जीडीए यहां बनाएगा वेंडिंग जोन
- रोड नंबर 11 ग्रीन बेल्ट, इंदिरापुरम
- शांति गोपाल अस्पताल के पास, इंदिरापुरम
- एसटीपी के पास, इंदिरापुरम
- नंदग्राम, राजनगर एक्सटेंशन
- क्रिश्चिन नगर बागू, विजयनगर
- आईएचएसडीपी हाउस के पास, विजय नगर
- अर्थला
इलेक्ट्रानिक कचरे का होगा सुरक्षित निस्तारण
शहर भर में इलेक्ट्रानिक कचरे के लिए अलग से लगाए जाएंगे डस्टबिन
गाजियाबाद। शहर से निकलने वाले इलेक्ट्रानिक कचरे के संग्रह करने से लेकर निस्तारण तक की अलग से व्यवस्था की जा रही है। गंगटोक की तर्ज पर इलेक्ट्रानिक कचरे को एकत्र करने के लिए शहर भर में अलग से डस्टबिन लगाए जाएंगे, जिनमें लोग घरों, दफ्तरों व अन्य जगहों से निकलने वाले इलेक्ट्रानिक कचरे को डाल सकेंगे। जल्द ही जीडीए व नगर निगम अपने क्षेत्र में अलग से डस्टबिन रखेंगे। इसके बाद नगर पालिका व पंचायतों में भी इस तरह की व्यवस्था की जाएगी।
डीएम रितु माहेश्वरी का कहना है कि हालिया गंगटोक दौरे के दौरान देखा गया कि वहां शहर भर में इलेक्ट्रानिक कचरा अलग से एकत्र किया जाता है। उसके निस्तारण की भी व्यवस्था है। अब गाजियाबाद में भी इसी तरह की पहल की जा रही है। निस्तारण का काम शुरुआत में किसी निजी कंपनी को सौंप कर कराया जाएगा। उसके बाद निगम व पालिका स्तर पर व्यवस्था की जाएगी।
ध्यान रहे कि इलेक्ट्रानिक कचरे को खुले में जलाने से पर्यावरण को भारी नुकसान होता है। प्लास्टिक के जलने से निकलने वाला धुआं वायु को दूषित करता है, जिसका सीधा असर सेहत पर पड़ता है। ऐसे में प्रशासन इलेक्ट्रानिक कचरे के निस्तारण की पुख्ता व्यवस्था करना चाहता है।