मोदी के डिजिटल इंडिया के सपने में कई विभाग से नहीं मिल रही परमिशन बाधा डाल रही है। गाजियाबाद, गढ़ और हापुड़ के 405 ग्राम पंचायतों को ऑनलाइन करने का काम चल रहा है। इनमें से 80 ग्राम पंचायत ऐसे हैं जहां काम शुरू करने के लिए पिछले दो वर्ष में भी कई विभागों की स्वीकृति नहीं मिली है।
बीएसएनएल महाप्रबंधक संजीव त्यागी ने बताया कि हापुड़, गढ़ और लोनी की 80 ग्राम पंचायत ऐसी हैं जहां तक फाइबर बिछाने के लिए कई विभाग रोड़ा बने हुए हैं। अधिकतम ग्राम पंचायतों तक फाइबर केबिल पहुंचाने के लिए वन विभाग, एनएचएआई और रेलवे की ओर से अनुमति न मिलने की वजह से परेशानी हो रही है।
जीएम ने बताया कि लोनी ट्रोनिका सिटी तक फाइबर पहुंचाने के लिए एनएचएआई से तो अनुमति मिल चुकी है, जबकि वन विभाग से अभी तक अनुमति नहीं मिली है। जंगल की वजह से गढ़ की 22 ग्राम पंचायत हापुड़ की 27 लोनी के साथ ही अन्य 31 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जिसे डिजिटल करना बीएसएनएल के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
बता दें कि वर्ष 2015 से ही हापुड़, गढ़ और गाजियाबाद के 405 गांवों को डिजिटल इंडिया से जोड़ने का काम चल रहा है। इनमें से अब तक 305 ग्राम पंचायतों तक बीएसएनएल फाइबर बिछने का काम लगभग पूरा हो चुका है। अन्य 10 गांवों में भी अप्रैल तक फाइबर बिछने का काम पूरा हो जाएगा।
बीएसएनएल महाप्रबंधक संजीव त्यागी ने बताया कि 325 ग्राम पंचायतों को तो अप्रैल तक ऑनलाइन कर लिया जाएगा लेकिन 80 ग्राम पंचायतों के लिए अब तक भी विभागों से अनुमति का इंतजार है।
इन ब्लॉक की ग्राम पंचायत होनी है ऑनलाइन
धौलाना, सिंभावली, गढ़, भोजपुर, रजापुर, हापुड़, मुरादनगर और लोनी