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आठ युवाओं ने किया प्लाज्मा दान, सेहत में सुधारᅠ

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आठ युवाओं ने किया प्लाज्मा दान, मरीजों की सेहत में सुधार
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माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। कोरोना संक्रमित बुजुर्गों और गंभीर मरीजों के लिए प्लाज्मा से इलाज शुरू करने पर तेजी से रिकवरी हो रही है। अब तक नेहरूनगर के यशोदा अस्पताल में आठ गंभीर मरीजों को प्लाज्मा चढ़ाया गया। इन संक्रमित मरीजों की सेहत में तेजी से सुधार हो रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि इस विधि से इलाज करने पर मरीजों में तेजी से रिकवरी हो जाती है।
े डॉ. ब्रजेश प्रजापत ने बताया कि अब तक आठ बुजुर्ग मरीजों को प्लाज्मा चढ़ाया जा चुका है। इनमें से दो की मौत हो गई थी। वह पहले से ही गंभीर बीमारी कैंसर एवं अन्य से ग्रसित थे। इसके अलावा छह के सेहत में तेजी से सुधार हो रहा है। उन्होंने बताया कि अस्पताल के दो स्टाफ संक्रमित हुए थे। स्वस्थ होने के बाद दोनों ने प्लाज्मा दान किया था। इसके अलावा छह अन्य युवाओं से संपर्क किया गया तो उन्होंने स्वेच्छा से प्लाज्मा दान किया है।
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1.5 आईजीजी से अधिक हो एंटीबॉडीज
डॉ. ब्रजेश ने बताया कि संक्रमण मुक्त होने के बाद 14 दिन तक अगर कोई लक्षण नहीं होता और उस व्यक्ति के शरीर की एंटीबॉडी का स्तर 1.5 से अधिक होता है तो वह प्लाज्मा दान कर सकता है। इसमें उसे कोई परेशानी नहीं होती है। उन्होंने बताया कि जितने लोगों ने प्लाज्मा दान किया है, सभी का आईजीजी स्तर यानी एंटीबॉडीज 12 से 15 के बीच था।
कोविड लेवल-3 में प्लाज्मा थेरेपी के लिए आवेदन
संतोष अस्पताल में सरकारी स्तर पर संचालित एल-3 कोविड अस्पताल में यह सुविधा शुरू किए जाने की तैयारी है। इसके लिए संतोष अस्पताल की ओर से आईसीएमआर में लाइसेंस के लिए आवेदन भी कर दिया गया है। सीएमओ डॉ. एनके गुप्ता ने बताया प्लाज्मा थेरेपी के लिए जरूरी प्लाज्मा एफेरेसिस मशीन के लिए मैक्स अस्पताल से बात की गई है। लाइसेंस मिलने के साथ ही सरकारी स्तर पर जनपद के एकमात्र एल-3 अस्पताल में प्लाज्मा थेरेपी शुरू कर दी जाएगी। फिलहाल जनपद में केवल एक निजी अस्पताल यशोदा में प्लाज्मा थेरेपी की व्यवस्था है।
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65 युवा आए प्लाज्मा देने
सीएमओ डॉ. एनके गुप्ता ने बताया कि संयुक्त अस्पताल लेवल-2 कोविड अस्पताल में भी प्लाज्मा थेरेपी की सुविधा शुरू कराने के लिए डीएम डॉ. अजय शंकर पांडेय ने शासन को पत्र लिखा है। सीएमओ ने बताया प्लाज्मा थेरेपी कोरोना संक्रमित गंभीर मरीजों को स्थिर करने में कारगर साबित हो रही है। इसमें कोरोना पॉजिटिव रहे व्यक्ति से निगेटिव आने के 14 दिन बाद प्लाज्मा लिया जाता है और इसे पॉजिटिव मरीज को चढ़ाया जाता है। हालांकि आईसीएमआर ने भी इसे स्टैंडर्ड केयर ऑफ ट्रीटमेंट (गारंटी का इलाज) नहीं माना है और इसे ऑफ-लेवल प्लाज्मा थेरेपी का नाम दिया है। सीएमओ ने बताया कि सरकारी कोविड अस्पतालों से अभी तक 65 युवाओं ने प्लाज्मा दान करने की इच्छा जताई है।
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