मास्टर साहब हड़ताल पर, 80 स्कूलों में लटका ताला
बुलंदशहर। शिक्षामित्रों के आंदोलन से जिले के करीब 80 परिषदीय स्कूल बंद हैं। स्कूल नहीं खुलने पर बच्चे बिना पढ़ाई के लौट रहे हैं। इससे अभिभावकों में गुूस्सा है। यह सभी स्कूल शिक्षामित्रों के सहारे चल रहे हैं। खास बात यह है कि इसका फायदा शिक्षक भी उठा रहे हैं और मनमर्जी से स्कूल खोल रहे हैं।
जिले में 1427 प्राइमरी और 751 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। इनमें करीब 1.90 लाख बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। जिले में करीब 6500 शिक्षक और 2600 से अधिक शिक्षामित्र तैनात हैं। इसमें 80 से अधिक स्कूल शिक्षामित्रों के सहारे चल रहे हैं। इनमें कुछ स्कूल ऐसे भी हैं, जिनके इंचार्ज या तो सस्पेंड हैं या फिर अधिकतर ने सीसीएल ले रखा है। इन स्कूलों में करीब 4500 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। बंद स्कूलों में अनूपशहर में नौ, पहासू में 11, अरनिया में आठ, खुर्जा में पांच, शिकारपुर में छह, डिबाई में सात, जहांगीराबाद में चार, ऊंचागांव में 10, स्याना में छह, अगौता में तीन, लखावटी में दो और बीबीनगर में चार स्कूल शामिल हैं। जबकि शेष स्कूल सिकंदराबाद, गुलावठी आदि ब्लॉक में हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षामित्र आंदोलन कर रहे हैं, इसके चलते इन स्कूलों में ताला लटक गया है। स्थिति यह है कि रोजाना बच्चे स्कूल समय पर पहुंच जाते हैं, लेकिन स्कूल न खुलने पर वह बिना पढ़ाई के ही घर लौटने को मजबूर हैं। इससे अभिभावकों में भी रोष गहराता जा रहा है कि उनके बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। यदि इसी तरह चलता रहा तो उनके बच्चों का भविष्य खराब हो जाएगा। वहीं दूसरी ओर अफसर भी चाहकर कुछ नहीं कर पा रहे।
शिक्षकों की कमी के चलते इन स्कूलों में शिक्षामित्र तैनात किए गए थे। इस समस्या को समायोजन में दूर कर दिया जाएगा। प्रयास किया जा रहा है कि स्कूलों को खोला जाए। इसके लिए शासन से भी आदेश मिल चुका है।
- अजीत सिंह, बीएसए
स्कूल रहा बंद
स्याना। गांव चांदपुर पूठी स्थित प्राईमरी स्कूल में कार्यरत शिक्षामित्रों के हड़ताल पर जाने के कारण स्कूल बंद हो गया। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत बच्चे निकटवर्ती जूनियर हाईस्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। ग्राम चांदपुर पूठी में दो महिला शिक्षमित्र द्वारा बच्चों को पढ़ाया जा रहा था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद शिक्षामित्र हड़ताल पर चले गए। शिक्षामित्रों की हड़ताल के चलते शिक्षण कार्य प्रभावित है। जूनियर हाईस्कूल के शिक्षक नरेंद्रपाल सिंह व अश्विनी शर्मा द्वारा बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।
एमडीएम से भी वंचित हो रहे बच्चे
आंदोलन के चलते स्कूल बंद होने से बच्चे एमडीएम से भी वंचित हो रहे हैं। अफसरों ने इसे गंभीरता से लिया है। सभी एबीएसए को बीएसए ने चेतावनी दी है कि कोई भी ऐसा स्कूल नहीं रहना चाहिए, जहां एमडीएम न बने। शासन द्वारा परिषदीय स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चों को निशुल्क शिक्षा, किताब और ड्रेस आदि दी जाती है। इसी तरह मिड-डे-मील के तहत बच्चों को दोपहर के भोजन की भी निशुल्क व्यवस्था की जाती है। पिछले तीन दिन से शिक्षामित्रों के आंदोलन पर जाने से अधिकतर स्कूलों में एमडीएम नहीं बन रहा। बीएसए अजीत सिंह का कहना है कि बच्चों को एमडीएम से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। इसके लिए उन्होंने जांच के आदेश एबीएसए को दे दिए हैं कि कोई भी स्कूल ऐसा नहीं होना चाहिए, जहां एमडीएम न बने। यदि कोई एमडीएम बनाने में आनाकानी कर रहा तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए।
हर हाल में खोले जाएं स्कूल
शिक्षामित्रों के आंदोलन पर चले जाने से स्कूल बंद करने के मामले में शासन ने सख्ती बरती है। बीएसए को आदेश भेजा है कि स्कूल नियमित खुलें। इस पर बीएसए ने सभी एबीएस को अवगत करवाकर बंद स्कूलों को खुलवाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। शिक्षामित्रों के आंदोलन का फायदा दूसरे शिक्षक भी उठा रहे हैं और वह मनमर्जी से स्कूल खोल रहे हैं। इसकी शिकायत शासन तक पहुंची तो शासन ने सभी बीएसए को आदेश जारी किए हैं कि एक भी स्कूल बंद नहीं होना चाहिए। इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। यदि अब किसी स्कूल के बंद होने की सूचना मिली तो कार्रवाई की जा सकती है। बीएसए अजीत कुमार ने बताया कि शासन का आदेश उन्हें मिल गया है। इस आदेश से सभी एबीएसए को अवगत करवाकर बंद स्कूलों को खुलवाने के निर्देश दे दिए हैं। चेतावनी दी है कि एक भी स्कूल बंद नहीं होना चाहिए।
शिक्षामित्रों का कलक्ट्रेट और बीएसए कार्यालय पर हंगामा
बुलंदशहर। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में शिक्षामित्रों का बीएसए कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन शनिवार को भी जारी रहा। पूरा दिन नारेबाजी जारी रही और उन्होंने कलक्ट्रेट पहुंचकर भी हंगामा किया। शिक्षामित्रों ने अपनी मांग का ज्ञापन प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेज दिया है। उन्होंने रविवार को ज्ञापन सांसद को सौंपने का भी निर्णय लिया है।
बीएसए कार्यालय में उप्र प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष संजय चौधरी ने कहा कि जब तक आरटीई एक्ट में संशोधन होता है, तब तक सरकार को चाहिए कि वैकल्पिक व्यवस्था कर शिक्षा सहायक के तौर पर सहायक अध्यापकों को समान वेतन दिया जाए। महामंत्री सलीम खान ने कहा कि अगर जल्दी सरकार द्वारा कोई ठोस निर्णय नहीं लिया तो शिक्षामित्रों का आंदोलन लगातार जारी रहेगा। वरिष्ठ उपाध्यक्ष शिव कुमार ने कहा कि कल सभी शिक्षामित्र राजेबाबू पार्क में एकत्रित होंगे और सांसद को मांग का ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके बाद यहां से शिक्षामित्र कलक्ट्रेट पहुंचे और एडीएम वित्त ब्रजेश कुमार को अपनी मांग का मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इसके बाद फिर शिक्षामित्र वापस बीएसए कार्यालय पहुंचकर धरना-प्रदर्शन पर बैठ गए। इस दौरान पूरनचंद शास्त्री, देवेंद्र सिंह, नीशू चौधरी, अमित कुमार, नीरज गोस्वामी, सविता चौधरी और बनी सिंह आदि शामिल रहे।
डीएम को ज्ञापन सौंपने पर अड़े शिक्षामित्र
जिस समय शिक्षामित्र कलक्ट्रेट पहुंचे तो उन्हें मुख्य गेट पर ही रोक दिया गया। उन्होंने अंदर जाने का काफी प्रयास किया, मगर भारी पुलिस बल के बीच उनकी एक नहीं चली। सिटी मजिस्ट्रेट उनका ज्ञापन लेने पहुंचीं, मगर शिक्षामित्र डीएम को ज्ञापन सौंपने पर अड़ गए। बाद में एडीएम वित्त मौके पर पहुंचे और उनका ज्ञापन लिया। डीएम द्वारा ज्ञापन न लेने पर शिक्षामित्रों में खासा रोष दिखाई दिया।
शिक्षामित्र हुई बेहोश, मचा हड़कंप
कलक्ट्रेट के गेट पर धूप में बैठने से एक शिक्षामित्र बेहोश हो गई। इससे हड़कंप मच गया। बेहोश हुई महिला शिक्षामित्र को काफी देर बाद होश आया।
बीएसए ने जाना छोड़ा कार्यालय, बाबू ही चला रहे कलम
शिक्षामित्रों के आंदोलन के चलते बीएसए ने कार्यालय छोड़ दिया है। बाबू ही कलम चला रहे हैं। अफसर और बाबुओं का कहना है कि शिक्षामित्र गेट पर बैठ जाते हैं और उनमें इस समय गुस्सा भी हैं। ऐसे में बीएसए कार्यालय नहीं पहुंच रहे और डायट परिसर में शिक्षकों के समायोजन का काम पूरा करवा रहे हैं।
धरना-प्रदर्शन पर नहीं, मोबाइल पर बिजी रहे पुलिसकर्मी
पुलिस को शिक्षामित्रों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए तैनात किया गया है लेकिन, पुलिसकर्मी धरना-प्रदर्शन पर नहीं, बल्कि मोबाइल पर बिजी रहे। यह अलग बात रही कि शिक्षामित्रों का धरना-प्रदर्शन शांतिपूर्वक रहा।
माहौल बिगाड़ने वाले नेताआें से शिक्षामित्रों ने बनाई दूरी
शिक्षामित्रों को उकसाने वाला वीडियो वायरल होने के बाद उन्होंने माहौल बिगाड़ने वाले नेताओं से दूरी बना ली है। शनिवार को धरना स्थल पर कोई नेता दिखाई नहीं दिया और कोई पहुंचा भी तो उसे बोलने का मौका नहीं दिया गया। यह अलग बात रही कि आम आदमी के चंद कार्यकर्ता अपनी राजनीति चमकाने पहुंचे और समर्थन देने का ऐलान किया। जिला संयोजक विकास शर्मा ने बताया कि शिक्षामित्रों को हक दिलवाने के लिए डीएम के माध्यम से महामहिम राज्यपाल को मांगपत्र भेजा गया है।
कलक्ट्रेट में नहीं मिली एंट्री, लगा जाम
जिस समय शिक्षामित्र कलक्ट्रेट पर पहुंचे तो उन्हें एंट्री नहीं मिली। ऐसे में वह बाहर सड़क पर ही बैठ गए, जिसके चलते जाम की समस्या बन गई। हालांकि भारी पुलिस बल ने जाम से निजात दिलाने का प्रयास किया, लेकिन सड़क पर शिक्षामित्राें के बैठ जाने से समस्या दूर नहीं हो पाई। करीब एक घंटे तक जाम की समस्या बनी रही। गनीमत यह रही कि जिस समय वह कलक्ट्रेट पहुंचे थे तो उस समय वाहनों की संख्या कम थी और शिक्षण संस्थानों की छुट्टी नहीं हुई थी।