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Ghaziabad News: 607 प्रसूताओं का नहीं हुआ भुगतान

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गाजियाबाद। जिले के अलग-अलग सरकारी अस्पतालों में हुए प्रसव के तीन महीने बाद भी 607 प्रसूताओं को जननी सुरक्षा योजना का भुगतान नहीं किया गया। इनमें 353 नगरीय क्षेत्र के अस्पताल और 253 का ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसव हुआ था। गत वर्ष सितंबर महीने की अपेक्षा इस वर्ष सितंबर तक कई केंद्रों पर भुगतान का अनुपात बढ़ा है। जिला महिला अस्पताल में प्रसव कम होने के साथ ही भुगतान भी 5.1 फीसदी कम हुआ है।
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जिला स्वास्थ्य समिति की रिपोर्ट के अनुसार जिला महिला अस्पताल में सितंबर महीने में 2719 प्रसव हुए थे, इनमें से सिर्फ 2475 प्रसूताओं को ही भुगतान किया गया। जबकि सितंबर 2022 में 2753 प्रसव हुए थे और उनमें से 2647 को भुगतान किया गया था। अधिकारियों का तर्क रहता है कि बैंक में खाता खुलवाने पर गैर जनपद के दस्तावेज होने से खाता नहीं खोलते हैं, जबकि उनके पास पहले से बैंक खाता रहता नहीं है। ऐसे में भुगतान नहीं हो पा रहा है।

पूर्व सीएमएस ने जन्म प्रमाण पत्र लेने से पहले बैंक खाता किया था अनिवार्य
पूर्व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक वर्तमान में स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. दीपा ने नवजात का जन्म प्रमाण पत्र लेते समय बैंक खाते की पासबुक की प्रति देना अनिवार्य कर दिया था। उनके जाने के बाद पूर्व जिलाधिकारी ने कहा था कि किसी बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र रोका नहीं जाएगा, अब प्रसूता प्रमाण पत्र लेने के बाद बुलाने पर भी नहीं आती।
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बैंक खाते की जगह डाकघर या ग्रामीण बैंक का खाता देकर निकल जाते हैं

महिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डॉ. अभिषेक त्रिपाठी ने बताया कि प्रसव के बाद अनिवार्य किया गया है कि किसी भी महिला को बिना बैंक खाता दिए डिस्चार्ज नहीं किया जाएगा। ऐसी स्थिति में विहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित अन्य प्रांतों की श्रमिक महिलाएं जो खाता देकर जाती हैं, वह अपडेट नहीं होता, कई बार डिस्चार्ज के समय भीड़ बढ़ने पर डाकघर या ग्रामीण बैंक खाते के पासबुक की प्रति देकर चली जाती हैं। भुगतान के समय ऑनलाइन ट्रांजिक्शन नहीं हो पाता है। इस मामले में कई बार अधिकारियों को जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में फटकार भी पड़ती है, लेकिन बार-बार फोन करने के बावजूद बैंक पासबुक नहीं देते, इसलिए भुगतान नहीं हो पा रहा है।

एक हजार और 1400 रुपये का होता है भुगतान
सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार का कहना है कि जननी सुरक्षा योजना के तहत नगरीय क्षेत्र में प्रसव होने पर प्रसूता को 1400 रुपये और ग्रामीण क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसव होने पर एक हजार रुपये का भुगतान किया जा रहा है। इसका उद्देश्य होता है कि प्रसव के बाद महिलाएं पोषक चीजों को खरीद कर खा सकें। भुगतान नहीं होने से बजट भी सीएमएस के खाते में ही पड़ा रहता है। सभी केंद्र प्रभारियों को निर्देश दिया गया है कि जल्द प्रसूताओं के खाते में भुगतान किया जाए।
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