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Ghaziabad News: पाकिस्तानी फैशन वाले कपड़ों की बिक्री में 60 फीसदी गिरावट, देसी अपना रहे लोग

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साहिबाबाद। पहलगाम आतंकी हमले के बाद का असर व्यापार में भी साफ दिखाई दे रहा है। पाकिस्तानी फैशन वाले महिलाओं के कपड़ों में 60 फीसदी तक की गिरावट देखी गई है। बिक्री कम होने की वजह से टीएचए के वैशाली, मोहन नगर और कौशांबी समेत कई बाजारों में व्यापारियों ने माल की मांग भी कम कर दी है। कपड़ा बाजारों में अब देसी फैशन की रंगत दिख रही है।
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कपड़ा व्यापारी तनमय त्यागी ने बताया कि खास तौर पर उन रेडीमेड सूट्स और लिबासों में यह गिरावट ज्यादा देखने को मिली है जो पाकिस्तान एक्सक्लूसिव डिजाइंस के नाम पर बिकते थे। उन्होंने कहा कि अब ग्राहक आते हैं और साफ कहते हैं कि देसी दिखाओ, विदेशी नहीं। उन्होंने बताया कि टीएचए की अधिकतर कपड़ा दुकानों पर माल दिल्ली के अमर कॉलोनी से सप्लाई होकर आता है। फैशन ट्रेंड में यह बदलाव सिर्फ भावनाओं का असर नहीं, बल्कि सोच में आए बदलाव का संकेत है। शालीमार गार्डन की खरीदार अंशिका गुप्ता कहती हैं कि पहले जो पाकिस्तानी डिजाइनों का क्रेज था, वो अब पुरानी बात हो गई। हमें अब अपने देश के हुनर और फैशन पर गर्व है। दुकानदार कृष्ण अरोड़ा ने बताया कि अब बाजार में लखनवी चिकनकारी, बनारसी बुनाई और राजस्थान की गोटा पट्टी वाले कपड़े ज्यादा पूछे जा रहे हैं। देसी कारीगरों और दर्जियों को इससे राहत मिली है, क्योंकि ग्राहक अब मेड इन इंडिया टैग को ही स्टाइल समझने लगे हैं। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के कम रुझान को देखते हुए व्यापारियों ने भी माल मंगाना कम कर दिया है। लोगों का मानना है कि युद्ध में हुई क्षति को कम करने के लिए जरूरी है कि हम इस तरह के ट्रेंड्स का बहिष्कार करें और अपने देश की तरक्की में योगदान दें।



पुराना स्टॉक बेचना हुआ मुश्किल

कपड़ा व्यापारी राहुल ने बताया कि पहले पाकिस्तानी ट्रेंड के चलते जो सूट दिनभर में 50 बिक जाते थे, अब पूरे हफ्ते में 10 भी नहीं निकलते। ऐसे में दुकानदारों के लिए पुराने स्टॉक को निकाल पाना ही काफी मुश्किल होता जा रहा है। पहलगाम हमले के बाद से ही लोगों ने पाकिस्तानी ट्रेंड का बहिष्कार कर दिया है। तो वहीं, इसके चलते भारतीय फैशन वाले कपड़ों की बिक्री में 40 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी हुई है। इनमें बनारसी और लखनवी अंदाज के कपड़ों की मांग ज्यादा है।
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