गाजियाबाद। साइबर अपराधियों ने इस साल जनवरी से जून तक छह महीने में ही गाजियाबाद के 541 लोगों से 54.41 करोड़ रुपये ठग लिए हैं। औसत देखा जाए तो रोज 30 लाख की चपत लगाई जा रही है। लूट और चोरी के मुकाबले साइबर अपराध में गई रकम कई गुना ज्यादा है। इसमें से पुलिस सिर्फ एक चौथाई 25.34 फीसदी ही वापस दिला सकती है। यह भी उन लोगों को मिली है, जिन्हें ठगी का शिकार होने के 24 घंटे के भीतर पुलिस को सूचना दे दी।
घर बैठे कमाई का झांसा देकर, किसी मामले में फंसने का डर दिखाकर और निवेश कर कम समय में रकम दोगुनी करने का झांसा देकर साइबर अपराधी लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। पिछले छह महीनों में सबसे ज्यादा ठगी शेयर में निवेश का झांसा देकर की गई है। डिजिटल अरेस्ट कर रकम वसूली के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं।
पुलिस साइबर अपराध से लोगों को बचाने के लिए जागरूकता अभियान चला रही है। इसके बावजूद लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं। वहीं, पुलिस भी ठगों को गिरफ्तार करने विफल हो रही है। पुलिस गिरोह के केवल निचले स्तर पर काम करने वाले शातिरों को पकड़ रही है जो ठगों को बैंक खाते, सिम उपलब्ध करा रहे हैं। गिरोह के मुख्य सरगना या ठगी करने वालों को नहीं पकड़ पा रही है।
वर्ष ठगी गई रकम
2021 : 4,28,33,983 रुपये
2022 : 11,38,73,627 रुपये
2023 : 26,54,03,202 रुपये
ठगों के हथकंडे
- टास्क पूरा करने पर कमाई का झांसा देकर
- शेयर ट्रेडिंग से मोटी कमाई का झांसा देकर
- अवैध कुरियर विदेश से आने का डर दिखाकर
- डिजिटल अरेस्ट करके रकम वसूली करना।
वर्जन
पुलिस टीम प्राथमिकता पर काम करके ठगी गई रकम को फ्रीज कराकर वापस कराती है। इसके बाद शातिरों को ट्रेस करने पर जोर दिया जा रहा है। क्योंकि, ठगी गई रकम अगर शातिर बैंक खातों से निकाल लेते हैं तो फिर रकम को बरामद करना मुश्किल होता है। लोगों को ठगी से बचने के लिए लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है- सच्चिदानंद, एडीसीपी अपराध
2023
मुकदमे : 1074
ठगी : 26,54,03,202 रुपये
फ्रीज : 3,35,30,840 रुपये
बरामदगी : 1,62,86,376 रुपये
बरामदगी प्रतिशत : 6.14
2022
मुकदमे- 774
ठगी : 11,38,73,627 रुपये
फ्रीज : 64,84,654 रुपये
बरामदगी : 17,20,870 रुपये
बरामदगी प्रतिशत : 1.51
2021
मुकदमे : 560
ठगी : 4,28,33,983 रुपये
फ्रीज : 14,77,024 रुपये
बरामदगी : 6,88,424 रुपये
बरामदगी प्रतिशत : 1.61