मेधावियों की चमक से जिले का नाम हुआ रोशन
गाजियाबाद। इंटरमीडिएट में जिला टॉपर बनकर ऐश्वर्या ने अपने माता-पिता और शिक्षकों की तपस्या को सफल बना दिया है। राजकीय कन्या इंटर कालेज की छात्रा ऐश्वर्या ने 88.40 प्रतिशत अंक हासिल कर जिला टॉप किया है। वह एरोस्पेस इंजीनियर बनाना चाहती हैं। रिजल्ट आते ही ऐश्वर्या का घर खुशियों से भर गया। पिता राजवीर सिंह दर्जी और मां संतोष देवी गृहणी हैं। उनकी चार बेटियां और एक बेटा है। पिता को तीन बार डेंगू हुआ। टेलरिंग का काम छूटा। उस वक्त बेटियों ने ही पढ़ाई के साथ सिलाई करके घर का खर्चा चलाया। ऐश्वर्या ने बताया कि घर में पांच भाई-बहन हैं। बड़ी बहन नेहा ने उक्त स्कूल से पढ़ाई करके 87.2 प्रतिशत अंक लाकर 2013 में स्कूल टॉप किया था। बड़ी बहन रोहिणी प्रगति विज्ञान संस्था से जुड़ी हुई है। जबकि एक बहल शीतल यूपी पुलिस में कांस्टेबल है। भाई आशीष बीसीए की पढ़ाई कर रहा है। सरकार के इंस्पायर अवार्ड में कंजर्वेशन ऑफ एनर्जी का मॉडल नेशनल लेवल तक पहुंचा। जबकि तीन प्रोजेक्ट जवाहर लाल नेहरू केंद्र के स्टेट लेवल पर प्रथम रहे।
रिविजन कर साहिल को मिला जिले में पांचवां स्थान
महर्षि दयानंद विद्यापीठ का दसवीं का छात्र साहिल का जनपद में पांचवां और स्कूल में पहला स्थान है। साहिल के पिता शाहिद अली पेशे से धोबी हैं। साहिल ने बताया कि उसने कभी ट्यूशन नहीं पढ़ा है बस स्कूल में जो भी पढ़ाया जाता है उसी को वह घर पर जाकर रिविजन करता है। अपनी छोटी बहन जो नौवीं कक्षा में पढ़ती है उसके साथ बैठकर पढ़ाई करता है। साहिल का सपना आईएस बनने का है। साहिल के पिता ने बताया कि साहिल ने रिजल्ट के लिए सुबह से रोजा रखा था।
हिमांशु गौतम का है सातवां स्थान
महर्षि दयानंद विद्यापीठ का 12वीं के छात्र हिमांशु गौतम ने जनपद में सातवां स्थान बनाया है और स्कूल में पहला स्थान है। हिमांशु के पिता श्रीलाल सिंह गौतम पेशे से राजमिस्त्री हैं। हिमांशु ने बताया कि उसने सिर्फ मैथ्स का ट्यूशन लिया था। हालांकि वह अपने रिजल्ट से खुश नहीं है। हिमांशु का सपना आईपीएस ऑफिसर बनने का है। उसने बताया कि वह बचपन से सिविल सर्विसेज में ही जाना चाहता है।